आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केजरीवाल और सिसोदिया ने कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की उस याचिका को खारिज करने की मांग की है, जिसमें उनको बरी किए जाने को चुनौती दी गई है।

जस्टिस मनोज जैन की सिंगल बेंच के सामने लंबित सीबीआई की रिवीजन याचिका में केजरीवाल और सिसोदिया ने आवेदन दाखिल कर इसकी सुनवाई पर ही सवाल उठाए हैं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि निचली अदालच द्वारा उन्हें बरी किए जाने के 4 घंटे के अंदर जांच एजेंसी (CBI) ने रिवीजन याचिका कर दी। उनके अनुसार, यह कदम अभूतपूर्व जल्दबाजी और अत्यंत गैर-गंभीरता से उठाया गया था।

केजरीवाल और सिसोदिया ने अपनी याचिका में क्या कहा?

अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया ने तर्क दिया कि सीबीआई की याचिका कानून के निर्धारित मानकों और सुप्रीम कोर्ट व विभिन्न हाईकोर्टों के तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसे सुनवाई योग्य नहीं माना जाना चाहिए।

केजरीवाल और सिसोदिया ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सीबीआई ने “अभूतपूर्व जल्दबाजी” दिखाते हुए रिवीजन याचिका दाखिल की। उनका कहना है कि विशेष अदालत द्वारा डिस्चार्ज का आदेश दिए जाने के महज चार घंटे के भीतर सीबीआई हाईकोर्ट पहुंच गई।

आम आदमी पार्टी के नेताओं ने याचिका में कहा, ” इन्हीं परिस्थितियों में सीबीआई ने अभूतपूर्व जल्दबाजी और अत्यंत गैर-गंभीरता से वर्तमान पुनरीक्षण याचिका दायर की है। यह पुनरीक्षण याचिका माननीय विशेष न्यायाधीश द्वारा बरी किए जाने के आदेश पारित होने के मात्र 4 घंटे के भीतर ही दायर की गई थी, जो स्पष्ट रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश के 500 से अधिक पृष्ठों के बरी किए जाने के फैसले में दिए गए निष्कर्षों की अनदेखी को दर्शाती है।”

AAP नेताओं ने सीबीआई की याचिका को ओम्निबस पिटीशन (Omnibus Petition) यानी एक सामान्य और व्यापक याचिका करार दिया है। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई यह बताने में नाकाम रही है कि ट्रायल कोर्ट ने किस आरोपी के मामले में बिना सबूत के फैसला दिया या कौन-सा महत्वपूर्ण साक्ष्य नजरअंदाज किया गया।

याचिका में यह भी कहा गया कि सीबीआई ने अपनी रिवीजन याचिका के साथ ऐसा कोई नया सबूत, दस्तावेज या सामग्री पेश नहीं की है, जिससे यह साबित हो सके कि डिस्चार्ज का आदेश त्रुटिपूर्ण, मनमाना या कानून के खिलाफ था। इसलिए सीबीआई की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

आम आदमी पार्टी के दोनों नेताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई की याचिका इतनी अस्पष्ट, सामान्य और गैर-विशिष्ट है कि उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर उन्हें किस आरोप या तर्क का जवाब देना है। उनका कहना है कि ऐसी याचिका को सुनवाई योग्य माना गया तो इससे उन्हें गंभीर कानूनी नुकसान होगा।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को कर दिया था बरी

27 फरवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और के. कविता समेत मामले के सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। निचली अदालत ने सीबीआई की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी। इसके बावजूद सीबीआई ने उसी दिन अपनी पुनरीक्षण याचिका दायर कर दी थी।

लोकसभा चुनाव के दौरान केजरीवाल को किया गया था गिरफ्तार

राजनीतिक रूप से यह मामला काफी सुर्खियों में रहा। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें हिरासत में भेज दिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 156 दिनों की हिरासत रे बाद केजरीवाल को जमानत दे दी थी। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने भी इस मामले में 530 दिन हिरासत में बिताए थे।

‘क्या आप अदालत को हल्के में ले रहे हैं?’ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को दिया अल्टीमेटम; जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले पैक्ड खाद्य पदार्थों के पैकेट पर चेतावनी वाला लेबल लगाने के नियम को लागू करे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एफएसएसएआई के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई और पूछा कि क्या अधिकारी कॉरपोरेट घरानों के दबाव में थे। पढ़ें पूरी खबर।