दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने वार्षिक रोस्टर व्यवस्था में बदलाव किया। इस बदलाव के तहत अब पूर्व सांसदों-विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई अब जस्टिस मनोज जैन करेंगे। यह मामले पिछले तीन साल से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा सुन रहीं थीं।

वहीं, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अब 1 जुलाई से सिविल रिट याचिकाओं की सुनवाई करेंगी। जिनमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, सूचना के अधिकार जैसे विषयों पर और दिल्ली परिवहन निगम, शहरी कला आयोग, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण आदि जैसे वैधानिक प्राधिकरणों से संबंधित मामले शामलि हैं।

हाई कोर्ट में हर साल गर्मियों की छुट्टियों के बाद अदालत खुलने से पहले मामलों के बंटवारे और सुनवाई को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने के लिए रोस्टर में बदलाव किया जाता है। इस बार का यह बदलाव 1 जुलाई से लागू होगा।

बता दें, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा हाल के महीनों में दिल्ली की आबकारी नीति मामले और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर चर्चा में रही हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब अरविंद केजरीवाल और अन्य पक्षकारों ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस शर्मा से उनके केस से अलग होने की मांग की थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग करने वाली अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य की याचिका को खारिज कर दिया था। अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने अपने ऊपर लगे पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया था।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा था कि न्यायाधीश की निष्पक्षता की एक पूर्वधारणा होती है और न्यायाधीश को मामले से हटाने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता को इस पूर्वधारणा का खंडन करना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवेदकों को जो व्यक्तिगत शक था, वह इतना मजबूत नहीं था कि यह माना जाए कि न्यायाधीश पक्षपात कर सकते हैं।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी से जुड़े लोगों ने यह तर्क नहीं दिया कि उनके पक्ष में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। इस न्यायालय के समक्ष अरविंद केजरीवाल की पार्टी के नेताओं सहित कई अन्य मामले लंबित हैं।

‘मैं केस से खुद को अलग नहीं करूंगी’, अरविंद केजरीवाल की जज बदलने वाली याचिका खारिज होने के 10 बड़े कारण

दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग करने वाली अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य की याचिका को खारिज कर दिया है। अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने अपने ऊपर लगे पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया। आइए जानते हैं कि किस आधार पर उन्होंने खुद को इस मामले से अलग करने की याचिका को खारिज किया। पढ़ें पूरी खबर।