जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की व्यवस्था को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर अब बड़े प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है क्योंकि वहां आने-जाने (इंग्रेस-एग्रेस) में दिक्कत होती है और आपातकालीन सेवाओं खासकर चिकित्सा सुविधाओं की आपूर्ति भी प्रभावित होती है।
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा, ”याचिका में कहा गया है कि आने-जाने की समस्या और मेडिकल जैसी जरूरी सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण जंतर-मंतर अब ऐसे प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त जगह नहीं है। मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण मुद्दा है। सॉलिसिटर जनरल निर्देश लें। नोटिस जारी किया जाता है और इस मामले को अलग से सूचीबद्ध किया जाए।”
केंंद्र सरकार को नोटिस जारी
इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत से कहा, ”अरविंद केजरीवाल ने टाउनहॉल बुलाया है और प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया है। 20 जुलाई जैसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए।”
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ”उन्हें (प्रशासन को) पता है कि स्थिति कैसे संभालनी है। अगर वे संभाल नहीं पाए और कोई गड़बड़ी हुई, तब आप हमारे पास आइए। मुझे पूरा भरोसा है कि वे स्थिति संभाल लेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब करते हुए नोटिस जारी किया है। अब इस याचिका पर अलग से सुनवाई होगी।
छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर आज सुनवाई
छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में एक पक्ष ने पुलिस अधिकारियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं कुछ याचिकाएं उन पुलिस अधिकारियों की ओर से भी दायर की गई हैं जो प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से घायल हुए थे। इसके अलावा, एक अलग याचिका में प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है।
इन मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ करेगी।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर सकता है। अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए घटनाओं से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर में नामजद छात्रों के खिलाफ फिलहाल किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगाई थी। हालांकि राज्यों को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
