बेंगलुरु की एक अदालत ने 27 जून को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड को समन जारी किया। यह समन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को लेकर दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत पर जारी किया गया।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट संदीप पाटिल ने माना कि प्रियांक खड़गे और नलपाड के बीएनएस की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला बनता है। इसलिए, जज ने दोनों के खिलाफ शिकायत का संज्ञान लिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफतौर पर कहा, “आरोपी नंबर 1 और 3 के खिलाफ बीएनएस 2023 की धारा 356 के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान लिया गया है। आरोपी नंबर 2 के खिलाफ कार्यवाही खत्म कर दी गई है। कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस मामले को आपराधिक मामले के तौर पर दर्ज करें और आरोपी नंबर 1 और 3 को समन जारी करे।” हालांकि, कोर्ट ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही करने से इनकार कर दिया।
किसने दर्ज कराई शिकायत?
अब शिकायत की बात करें तो यह बेंगलुरु के रहने वाले और आरएसएस के कार्यकर्ता ए तेजस ने दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि आरोपी ने अक्टूबर 2025 में आरएसएस और उसके सदस्यों को निशाना बनाते हुए कई अपमानजनक बयान दिए थे।
शिकायत के मुताबिक, प्रियांक खड़गे ने 4 अक्टूबर 2025 को कर्नाटक सरकार को पत्र लिखकर मांग की थी कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सरकारी खेल के मैदानों, स्कूलों और कॉलेजों का इस्तेमाल करने से रोका जाए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संगठन को बदनाम करने के मकसद से यह पत्र जानबूझकर मीडिया को जारी किया गया और खड़गे के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया।
शिकायतकर्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट का किया जिक्र
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत में पिछले साल 13 और 14 अक्टूबर को खड़गे की ओर से किए गए कथित सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया गया है। खड़गे ने 14 अक्टूबर को पोस्ट में लिखा, “अगर आपका भाई, बहन या घर का कोई और व्यक्ति आरएसएस में काम कर रहा है, तो उनसे अपने रिश्ते खत्म कर लें।”
उन्होंने आगे कहा कि दो दिन बाद विधायक दिनेश गुंडू राव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। इसमें गौरी लंकेश, गोविंद पानसरे और एमएम कलबुर्गी की हत्याओं के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने कहा है कि शांतिनगर के विधायक हैरिस के बेटे नलपाड ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा था कि आरएसएस में कोई दम नहीं है। इन तीनों की इसी टिप्पणी से नाराज होकर शिकायतकर्ता ने तीनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
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कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत को पत्र लिखकर कुछ प्रश्न पूछे हैं और इसके पंजीकृत नहीं होने का कारण जानना चाहा है। भारतीय विमर्श परंपरा में प्रश्नोत्तर का विशेष महत्त्व है। प्रश्न करने वाला स्वयं विषय को समझता है और उस पर अपनी आलोचनात्मक राय रखता है। प्रश्नों से वह विचार पर द्वंद्व और अज्ञानता को दूर करना चाहता है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
