Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गाजियाबाद में मार्च में हुई एक बाल यौन शोषण पीड़िता को मेडिकल देखभाल में विफल रहने के लिए एक आयुर्वेदिक डॉक्टर को फटकार लगाई।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच उस बच्ची के पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मामले की जांच और मेडिकल मदद में गंभीर कमियों का मुद्दा उठाया गया था।
आप उसे खुद अस्पताल ले जाते- सुप्रीम कोर्ट
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने डॉक्टर से कहा, “एक बच्ची को आपके सामने लाया गया और आप इतने निर्दयी हैं कि आपने उसे मेडिकल सहायता भी नहीं दी। अगर आपमें थोड़ी भी सहानुभूति होती, तो आप उसे खुद अस्पताल ले जाते।” अदालत ने यह भी कहा कि जिस अस्पताल में पीड़ित को ले जाया गया था, उसने बेहद निर्मम तरीके से काम किया और उसे पीड़ित के परिवार को उचित मुआवजा देने का आदेश दिया।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “जब हम जुर्माना लगाएंगे, तो इसका भयावह प्रभाव पड़ेगा। पीड़ित मुआवजे के बारे में सोचें और परिवार को उचित मुआवजा दें। आपने बेहद निर्दयता से काम किया है।”
अप्रैल के महीने में भी कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में दो प्राइवेट हॉस्पिटल के साथ-साथ स्थानीय पुलिस का भी पूरी तरह से उदासीन और असंवेदनशील रवैया था। इसलिए इसने मामले की जांच के लिए एक एसआईटी के गठन का आदेश दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी, “आरोपित अपराध का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह दो प्राइवेट अस्पतालों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस के पूर्ण उदासीनता और असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है।”
क्या था पूरा मामला?
अब पूरे मामले की बात करें तो यह घटना 16 मार्च को घटी थी, जब बच्ची के पिता घर लौटे और एक पड़ोसी चॉकलेट खरीदने के बहाने उसे अपने साथ ले गया। जब वे वापस नहीं लौटे, तो उसे ढूंढने के लिए निकले। बाद में बच्ची बेहोश और खून से लथपथ मिली। दो प्राइवेट अस्पतालों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। आखिरकार उसे गाजियाबाद जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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