Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद मामले में कुछ नेताओं के गैर जिम्मेदाराना बयानों पर सख्त नाराजगी जाहिर की। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि जब मामले सूचीबद्ध होते हैं, तो पक्षकार स्थगन की मांग करते हैं और फिर मीडिया में जाकर आरोप लगाते हैं कि मामलों की सुनवाई नहीं हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच उद्धव ठाकरे की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें उन्होंने चुनाव आयोग के एकनाथ शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता देने के फैसले को चुनौती दी थी। महाराष्ट्र स्पीकर द्वारा शिंदे गुट के सदस्यों को अयोग्य घोषित न करने के फैसले को चुनौती देने वाली सुनील प्रभु की याचिका भी आज सूचीबद्ध थी।
मुख्य न्यायाधीश ने दी तीखी प्रतिक्रिया
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब मामले पर सुनवाई शुरू हुई, तो यूबीटी की ओर से पेश हुए एक वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई जल्द से जल्द की जाए। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “सबसे पहले, आप अपने लोगों को मीडिया में जाकर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से रोकें, जिसमें वे कह रहे हों कि सुप्रीम कोर्ट फैसला नहीं कर रहा है।”
जब वकील ने जल्द सुनवाई की मांग की, तो मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि पक्षकार अदालत के समक्ष स्थगन की मांग नहीं कर सकता, जबकि साथ ही साथ सार्वजनिक रूप से देरी के लिए उसकी आलोचना भी कर रहा हो। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “आप यहां तारीख मांगते हैं और फिर कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट फैसला नहीं सुना रहा है। हम चेतावनी दे रहे हैं। अपने शब्दों का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। मैं इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करूंगा।”
शिवसेना यूबीटी की ओर से पेश हुए वकील ने क्या कहा?
यूबीटी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि वे अदालत की सुविधा के अनुसार मामले पर बहस करने के लिए तैयार हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा, “आप बहस नहीं करना चाहते, आप बयान देना चाहते हैं। जब मामला उठाया जाता है, तो आप तारीख तय करने को कहते हैं। जब हम तारीख तय कर लेते हैं, तो आप पूछते हैं कि यह विशेष राजनेता ऐसे बयान क्यों दे रहा है?”
इसके बाद वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अनुरोध किया कि मामले को जुलाई के आखिरी हफ्ते में सूचीबद्ध किया जाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय की चिंता मामले की लंबितता के संबंध में राजनेताओं द्वारा दिए जा रहे सार्वजनिक बयानों को लेकर है।
सीबीआई दिल्ली के ज्यादातर लोगों की एलएलबी डिग्रियों की जांच करे- सीजेआई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फर्जी डिग्री धारक वकीलों की बढ़ती संख्या के मुद्दे पर चिंता जताई। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने टिप्पणी की कि केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को इस मामले की जांच करनी चाहिए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
