सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कामकाज को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कामकाज की गहन जांच का आदेश देंगे। क्योंकि रजिस्ट्री के कुछ अधिकारी सुचारू रूप से कामकाज सुनिश्चित करने के लिए नए सुधार किए जाने के बावजूद कथित तौर पर अपनी मनमानी कर रहे हैं।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा खारिज की गई एक याचिका को बाद में दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया।

सीजेआई ने कहा, “मैं रजिस्ट्री के कामकाज की गहन जांच का आदेश दूंगा। रजिस्ट्री में ऐसे अधिकारी हैं जो पिछले 20-30 वर्षों से यहां हैं। वे सोचते हैं कि हम (न्यायाधीश) सभी अस्थायी हैं और वे स्थायी हैं। इसलिए, चीजें उनकी मर्जी के मुताबिक ही होनी चाहिए। यदि मैं अपने कार्यकाल समाप्त होने से पहले इसे ठीक नहीं करता, तो मैं अपने कर्तव्य में विफल हो जाऊंगा।”

सीजेआई की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के प्रशासनिक कामकाज और लंबे समय से कार्यरत अधिकारियो द्वारा स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के कथित दुरुपयोग के बारे में गंभीर चिंताओं को दर्शाती है।

चीफ जस्टिस का यह बयान रजिस्ट्री के संचालन में सुधार और इसे सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के मद्देनजर आया है। ताकि दक्षता सुनिश्चित की जा सके और न्यायिक प्रोटोकॉल का पालन किया जा सके।

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (शिक्षा मंत्रालय) के सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे यह स्पष्टीकरण मांगा है। जिसमें कहा गया है कि कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक वाला उप-अध्याय शामिल करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना ​​या अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने विवादित विषय को शामिल करने पर एनसीईआरटी की माफी के बावजूद स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही रोकने से इनकार कर दिया और पाठ्यपुस्तक के उस भाग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेश का उल्लंघन करने का कोई भी प्रयास न्याय प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप माना जाएगा और न्यायालय की अवमानना ​​का पात्र हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी को उस शिक्षण-अधिगम सामग्री समिति का विस्तृत रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है जिसने अध्याय को मंजूरी दी थी, जिसमें विकास दल के सभी सदस्यों के नाम, योग्यता और प्रमाण पत्र शामिल हों।

‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NCERT को दिया ऑनलाइन PDF हटाने का निर्देश

 सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर सख्त रुख अपनाते हुए ऑनलाइन PDF हटाने का निर्देश दिया साथ ही CJI सूर्यकांत ने जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान करने की बात कही है। पूरी खबर पढ़ें।