दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी की 92 साल की पत्नी ने कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसमें उसने कहा कि उसके स्वतंत्रता सेनानी पति के योगदान के सम्मान में भारत सरकार द्वारा उन्हें दी जा रही पेंशन को 2019 में रोक दिया गया था। जस्टिस सचिन शंकर मगदुम ने बुधवार को इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से जवाब मांगा।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार की सुनवाई के दौरान राज्य के वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार पेंशन में अपना हिस्सा देना जारी रखे हुए है और पेंशन का भुगतान न करने का कारण केंद्र सरकार है।

याचिकाकर्ता (विधवा) की ओर से पेश होते हुए अधिवक्ता श्रीनिवासा ने बताया कि उनके पति जी रामैया एक स्वतंत्रता सेनानी थे। जिन्हें 1972 में ताम्र पत्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1973 में भारत सरकार ने एक स्वतंत्रता सेनानी को सम्मानित करने के लिए पेंशन स्वीकृत की। 2000 में स्वतंत्रता सेनानी की मृत्यु के बाद यह पेंशन उनकी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलती रही।

याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि उन्हें फरवरी 2019 तक केंद्र और राज्य दोनों की पेंशन नियमित रूप से मिलती रही। हालांकि, राज्य पेंशन का भुगतान जारी रहा, लेकिन मार्च 2019 से बिना किसी औपचारिक आदेश या सूचना के केंद्र पेंशन का भुगतान अचानक बंद कर दिया गया।

याचिका में आगे कहा गया है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद पेंशन बहाल करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। विधवा की याचिका के अनुसार, जुलाई 2019 में जिला कोषाधिकारी (District Treasury Officer) ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन पुस्तिका खो गई थी और उसकी एक प्रतिलिपि बनाने का अनुरोध किया था।

2019 और 2022 के बीच, सरकार और यूनियन बैंक के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कई बार बातचीत की, लेकिन पेंशन जारी करने में विफल रहे। सितंबर 2025 में भारत सरकार ने एक कानूनी नोटिस का जवाब देते हुए बैंक को पेंशन जारी करने का निर्देश दिया।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा स्वतंत्रता सेनानी की पारिवारिक पेंशन की बकाया राशि उनकी विधवा के खाते में जमा करने के लिए कदम उठाने में विफल रहने के बाद, उन्होंने राहत के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया। अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि वह बिस्तर पर पड़ी है। साथ ही उसने केंद्र सरकार द्वारा जारी पेंशन का भुगतान बहाल करने के निर्देश देने की मांग की है।

‘पेंशन कोई बख्शीश नहीं है’, यूपी सरकार की मनाही और हाई कोर्ट के ढुलमुल रवैया के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर से पीड़ित एक वरिष्ठ नागरिक को राहत देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट को जरूरी निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा कि वह उसकी पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से संबंधित याचिका पर जल्द सुनवाई करे, जो पिछले नौ वर्षों से लंबित है। पढ़ें पूरी खबर।