SFI नेता अक्षत त्रिपाठी को नोटिस जारी करने वाले एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को सस्पेंड कर दिया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस बात की जानकारी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को दी।

अक्षत त्रिपाठी को पिछले सप्ताह जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर नोटिस जारी किया गया था। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बावजूद दिया गया था, जिसमें प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ आगे कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी। हालांकि, बाद में अक्षत को जारी नोटिस वापस ले लिया गया।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। शीर्ष अदालत जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जुलाई में हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी।

बुधवार को जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने आया तो सीजेआई सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट अपने 1 सितंबर के आदेश में पहले ही इस कार्रवाई को रद्द कर चुका है और साफ निर्देश दे चुका है कि पहले से दर्ज FIRs पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की?

गुरुवार को अक्षत त्रिपाठी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीवी दिनेश ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों के बाद छात्र ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। अदालत के हस्तक्षेप की अपील करते हुए वकील ने कहा कि इन लोगों को एक संदेश मिलना चाहिए।

सीजेआई ने कहा कि बुधवार को जब यह मामला अदालत के संज्ञान में लाया गया था, तब उन्होंने इस पर पहले ही कड़ा रुख अपनाया था। इसके बाद मेहता ने अदालत को निलंबन के बारे में सूचित किया और कहा, “आइए इसे सनसनीखेज न बनाएं।”

नोटिस जारी होने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों के खिलाफ सभी मामलों को रद्द कर दिया गया था।

सीजेआई ने कहा, “किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह एक बहुत ही स्पष्ट आदेश था। इसकी भाषा बहुत सरल है। एक आम आदमी भी इसे समझ सकता है। कार्यकारी मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट… उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकते।”

अपनी याचिका में त्रिपाठी ने कहा कि वह एसएफआई की यूपी कमेटी के सदस्य हैं। त्रिपाठी के मुताबिक, गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट-III ने उन्हें नोटिस जारी किया था। नोटिस में उनसे पूछा गया था कि उन्हें BNSS की धारा 126/135 के तहत 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के दो जमानती बांड भरने के लिए क्यों न पाबंद किया जाए। आरोप था कि उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी के दूसरे छात्रों को प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए उकसाया था। यह धरना कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किया गया था।

उन्होंने कहा कि वह उन 2,873 व्यक्तियों के लिए बनाए गए अपवाद के दायरे में नहीं आते हैं, जिनका गंभीर और जघन्य अपराधों का आपराधिक इतिहास रहा है और जिनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी थी।

अक्षत त्रिपाठी ने कहा कि 1 सितंबर के आदेश के तीन दिन बाद जारी किए गए नोटिस में उनके किसी बयान या आसन्न हिंसा की घटना का विवरण नहीं दिया गया था। इसमें न तो किसी घटना की तारीख, समय, बयान या हिंसा की कोई तत्काल आशंका बताई गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैलाने और छात्रों को प्रस्तावित, शांतिपूर्ण धरने में शामिल होने के लिए उकसाने जैसे अस्पष्ट, बिना सबूत और दुर्भावनापूर्ण आरोपों पर आधारित था।

उन्होंने कहा, “यह कार्रवाई बेहद सख्त तरीके से की गई एक निवारक कार्रवाई है। यह सिर्फ इसलिए एक छात्र के खिलाफ की गई क्योंकि वह शांतिपूर्ण तरीके से लोगों के इकट्ठा होने और संविधान से मिले अभिव्यक्ति के अधिकार का समर्थन कर रहा था। इसलिए यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की आजादी), 19(1)(b) (शांतिपूर्ण सभा का अधिकार) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करती है। साथ ही, यह 1 सितंबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए बाध्यकारी निर्देशों के भी सीधे खिलाफ है।”

त्रिपाठी ने कहा कि नोटिस में अगले ही दिन, यानी 05.09.2026 को पेशी की तारीख तय की गई थी, जिससे उन्हें वकील नियुक्त करने, असाधारण मात्रा में जमानत की व्यवस्था करने और बचाव तैयार करने के लिए केवल एक दिन का समय मिला, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और निवारक/सुरक्षा कार्यवाही के तहत भी परिकल्पित उचित अवसर की आवश्यकता का उल्लंघन है।

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