हिमाचल प्रदेश उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसले में कहा है कि कोई भी प्राइवेट हॉस्टल अगर बुनियादी सुविधाएं न दे सके तो वह छात्रों से भारी-भरकम फीस वसूल नहीं सकता।

उपभोक्ता आयोग ने ग्रेटर नोएडा के एक हॉस्टल को निर्देश दिया है कि वह छात्रा को 30,000 रुपये 9% ब्याज के साथ वापस करे। साथ ही मुआवजे और मुकदमेबाजी में लगे खर्च के रूप में 10,000 भी दे।

क्या है यह मामला?

इस मामले में B.Tech के छात्र आर्यन रावत ने हॉस्टल में मिलने वाले खराब खाने, रखरखाव में खराबी, वाईफाई सुविधा न मिलने के कारण एक हफ्ते के भीतर हॉस्टल छोड़ दिया था।

कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद, नारायण ठाकुर इस मामले में आर्यन रावत द्वारा दायर शिकायत पर सुनवाई कर रहे थे। आर्यन रावत ने ग्रेटर नोएडा स्थित नालंदा लिविंग हॉस्टल के खिलाफ शिकायत दायर की थी। शिकायत में छात्र का आरोप था कि हॉस्टल में आने के समय जिन सुविधाओं का वादा किया गया था, वह नहीं दी गई। छात्र ने एडवांस पैसा वापस करने और मुआवजा देने की मांग भी की थी।

कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 25 जून को अपने फैसले में कहा, ‘पहले से एडवांस फीस लेना और रहने लायक बुनियादी सुविधाएं, ढंग का खाना और इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं देना कंज्यूमर प्रोटक्शन एक्ट के तहत सेवाओं में कमी का मामला है।’

शिकायतकर्ता आर्यन रावत के मुताबिक, उसने ग्रेटर नोएडा की आईआईएलएम यूनिवर्सिटी में 17 अगस्त, 2023 को B.Tech प्रोग्राम में दाखिला लिया था। उसे रहने के लिए जगह चाहिए थी इसलिए उसने उसी दिन नालंदा लिविंग हॉस्टल को रहने के लिए चुना और एक एयर कंडीशनर रूम के लिए 35,000 रुपये दिए।

छात्र के मुताबिक, हॉस्टल ने कहा था कि वह अच्छा खाना, बेहतर वाई-फाई कनेक्टिविटी और रखरखाव देगा और इस वजह से उसने हॉस्टल को चुना। आर्यन रावत ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में जाने के कुछ दिन बाद ही उसे बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

खराब थी खाने की क्वालिटी

शिकायतकर्ता के मुताबिक, जो खाना उसे दिया गया उसकी क्वालिटी खराब थी, हॉस्टल में रखरखाव ठीक नहीं था और वाई-फाई सुविधा भी कभी नहीं मिली क्योंकि कई बार कहने के बाद भी इसका पासवर्ड नहीं दिया गया। 23 अगस्त को आर्यन रावत ने हॉस्टल के मैनेजर से कहा कि इन खामियों की वजह से वह हॉस्टल में नहीं रहना चाहता।

मैनेजर ने कहा कि एक हफ्ते के पैसे काटकर उसके खाते में रिफंड कर दिए जाएंगे। छात्र की ओर से कई बार फोन कॉल और रिमाइंडर दिए जाने के बाद भी किसी तरह का रिफंड नहीं किया गया। इसके बाद आर्यन रावत ने उपभोक्ता आयोग के सामने इसकी शिकायत की।

आयोग ने हॉस्टल के प्रबंधन को दो बार नोटिस दिया लेकिन उनकी ओर से कोई भी हाजिर नहीं हुआ। इसके बाद हॉस्टल के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस तरह के मामलों में स्टूडेंट और अभिभावक, अगर हॉस्टल अपने वादों को पूरा नहीं करते तो उपभोक्ता आयोग से संपर्क कर सकते हैं।

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