कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक ऐसे शख्स की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसने कथित तौर पर लव रिलेशन की आड़ में एक महिला का यौन उत्पीड़न किया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह कहा कि “कोई भी सच्चा प्रेमी इंटीमेट पलों की तस्वीरें लेने और अपने पार्टनर को ब्लैकमेल करके जबरदस्ती सेक्स नहीं करेगा।”
आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस वी श्रीशानंद ने कहा, “यह मानते हुए कि यह घटना प्यार के रिश्ते की वजह से आपसी सहमति से हुई थी, कोई भी सच्चा प्रेमी इंटीमेट सीन की तस्वीरें लेने और पीड़ित लड़की को जबरदस्ती सेक्सुअल इंंटरकोर्स के लिए ब्लैकमेल नहीं करेगा।”
कोर्ट में सनुवाई के दौरान क्या निष्कर्ष निकला?
- यह बिल्कुल साफ है कि दोनों पक्षों के बीच नजदीकी संबंध बन गए थे।
- पीड़िता को याचिकाकर्ता ने प्रेम संबंध का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के लिए फुसलाया था।
- पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया गया और जो शारीरिक संबंध बने थे, वे सहमति से नहीं थे।
- आरोपी ने पीड़िता की अंतरंग पलों की तस्वीरें लीं।
- उसने पीड़िता को धमकी दी कि अगर वह जबरन यौन संबंध बनाने के उसके निर्देश का पालन नहीं करेगी तो वह तस्वीरें सार्वजनिक कर देगा।
- ब्लैकमेल असहनीय होने के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। और मामले की जांच की गई, और चार्जशीट दायर की गई।
- आरोपी फरार है और उसे अग्रिम जमानत जैसी विशेष राहत देने के लिए कानून का पालन करने वाला नागरिक नहीं कहा जा सकता।
- प्रेम संबंध के नाम पर कोई भी सहमति वाला काम किसी प्रेमी को दूसरे पक्ष को उनकी अंतरंग तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी देकर शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने की इजाजत नहीं देता।
- जांच द्वारा इकट्ठा किए गए शुरुआती सबूतों को देखते हुए, आरोपी की याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता।
जानिए केस का बैकग्राउंड
- आरोपी ने कथित तौर पर पीड़िता के साथ रिश्ता बनाने के बाद लड़की का यौन उत्पीड़न किया।
- उसने कथित तौर पर उनके निजी पलों को रिकॉर्ड किया और जब भी बुलाया जाता, शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
- 11 मार्च, 2025 को जब आरोपी के साथ पीड़िता के रिश्ते की बात उसके परिवार तक पहुंची तो पीड़िता ने अपराध की रिपोर्ट की।
- BNS, 2023 की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67(A) (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित करने या प्रसारित करने के लिए दंड) के तहत मामला दर्ज किया गया।
- पुलिस ने जांच की, चार्जशीट दायर की और आरोपी को फरार घोषित कर दिया।
- इसके बाद आरोपी ने अग्रिम जमानत के लिए आदेश प्राप्त करने का प्रयास किया, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उसे मना कर दिया।
