गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को नोटिस जारी किया है। याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हेड स्पीच देने से रोकने के निर्देश देने की मांग की गई।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जनहित याचिका में कहा गया है कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के कथित हेट स्पीच के सार्वजनिक वीडियो होने के बावजूद असम पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की है। याचिका में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई न होने से भय का माहौल पैदा होता है।
असमिया स्कॉलर डॉ. हिरेन गोहेन और दो अन्य ने जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें मुख्यमंत्री हिमंता शर्मा को कथित घृणास्पद भाषण देने और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नागरिकों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाने से रोकने के निर्देश देने की मांग की गई है। इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने कथित घृणास्पद भाषण के लिए सरमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने के लिए कहा था।
मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि भारत सरकार, असम राज्य, उपमुख्यमंत्री और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को नोटिस जारी किए जाएं। न्यायालय ने अंतरिम राहत की याचिका पर भी नोटिस जारी किया।
जब याचिकाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को बयान देने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश की मांग की तो अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि इस स्तर पर, पहले नोटिस जारी किए जाएं । याचिका पर विचार जारी रहने तक यह एक सामान्य रोक होगी। मुख्य और अंतरिम दोनों प्रार्थनाओं के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। हम इसे बिहू की छुट्टियों के बाद जारी करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्तर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नोटिस जारी करना आवश्यक नहीं है।
मुख्यमंत्री ने पद की शपथ, धर्मनिरपेक्षता और बंधुत्व का उल्लंघन किया
याचिकाकर्ताओं में से एक के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस व्यक्ति के कार्यों की निरंतरता, नियमितता और आदतन प्रकृति को ही देख लीजिए। वह अपने पद की शपथ और अनुच्छेद 14, 15, प्रस्तावना के शब्दों, धर्मनिरपेक्षता और बंधुत्व तथा बीएनएस के प्रावधानों के सभी ज्ञात नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हिमंता सरमा के कथित भाषण से संबंधित बयानों और वीडियो का हवाला देते हुए सिंघवी ने तर्क दिया कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद की शपथ लेता है, विशेषकर राज्य के मुख्यमंत्री की, तो इस तरह की घटनाएं अस्वीकार्य हैं। एक दोहराव वाला पैटर्न देखा जा सकता है।
सिंघवी ने छत्तीसगढ़ में 2023 में सरमा द्वारा की गई कथित टिप्पणी का हवाला देते हुए तर्क दिया कि मुख्यमंत्री की “लव जिहाद” और “अवैध धार्मिक धर्मांतरण” पर की गई टिप्पणियों का पूरे देश पर प्रभाव पड़ा।
सिंघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि अगर गांधीजी यह व्याख्या सुनते तो अपनी कब्र में करवटें बदल लेते। हम यह नहीं भूल सकते कि उन्होंने पद की शपथ ली है। मैं यह कहकर अपनी बात समाप्त कर रहा हूं कि एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, ऐसे भाषण बंद होने चाहिए और मुख्यमंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। सिंघवी ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए उन्हें ‘मिया मुस्लिम’ कहा गया।
CJI सूर्यकांत कराएंगे सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की गहन जाँच
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कामकाज को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कामकाज की गहन जांच का आदेश देंगे। क्योंकि रजिस्ट्री के कुछ अधिकारी सुचारू रूप से कामकाज सुनिश्चित करने के लिए नए सुधार किए जाने के बावजूद कथित तौर पर अपनी मनमानी कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।
