बेंगलुरु के टेक्नीशियन अतुल सुभाष की मौत से जुड़े मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है। अदालत ने मौखिक रूप से सवाल उठाया कि अगर कोई पति अपनी पत्नी से परेशान होकर आत्महत्या कर लेता है, तो क्या उसे आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जाएगा?
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें आत्महत्या के लिए उकसाने (एबेटमेंट ऑफ सुसाइड) की एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है। यह एफआईआर अतुल सुभाष की मौत के बाद दर्ज हुई थी। इस मामले में आरोपित उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया, उनकी सास और साला हैं।
न्यायमूर्ति एस.आर. कृष्णा कुमार ने राज्य सरकार और अतुल सुभाष के भाई विकास कुमार को नोटिस जारी किया है। विकास कुमार ही इस मामले में शिकायतकर्ता हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अतुल को उनकी पत्नी और ससुराल पक्ष की ओर से झूठे वैवाहिक मामलों में फंसाकर परेशान किया जा रहा था।
सुभाष ने मौत से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था
बताया गया है कि अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर 2024 को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। अपनी मौत से पहले उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने पत्नी और ससुराल वालों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
याचिकाकर्ताओं ने पहले भी हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय मामला भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 108 और धारा 3(5) के तहत दर्ज हुआ था। हालांकि उन्होंने अपनी पहली याचिका बाद में वापस ले ली थी। अब वे दोबारा उसी राहत के लिए कोर्ट पहुंचे हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुलिस ने इस मामले में 50 गवाहों के बयान के साथ चार्जशीट दाखिल कर दी है। लेकिन आरोपित पक्ष के वकील भारत कुमार वी ने दलील दी कि चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।
इस पर न्यायाधीश ने उस वीडियो का जिक्र किया जो अतुल सुभाष ने आत्महत्या से पहले रिकॉर्ड किया था। कोर्ट ने पूछा, “अगर पति को लगता है कि पत्नी उसे परेशान कर रही है और वह आत्महत्या कर लेता है, तो क्या यह आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जाएगा? फिर पति को आत्महत्या करने से पहले और क्या महसूस करना चाहिए?”
हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि वह पूरे सबूत देखे बिना चार्जशीट को रद्द नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान और बाकी साक्ष्यों को ध्यान से देखना जरूरी है। इसलिए याचिकाकर्ताओं और जवाब देने वालों को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई से पहले एक संक्षिप्त विवरण (सिनॉप्सिस) दाखिल करें। इसमें यह बताया जाए कि कौन-कौन से गवाहों के बयान आरोपों का समर्थन करते हैं और कौन नहीं।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। साथ ही अदालत ने आरोपित पक्ष की यह मांग स्वीकार कर ली कि उन्हें ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी जाए। यह मामला अब अदालत में विचाराधीन है और अंतिम फैसला साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महिला की याचिका खारिज कर दी। महिला ने मांग की थी कि जिस व्यक्ति पर उसने शादी का झूठा वादा करके बलात्कार करने का आरोप लगाया है, उसके माता-पिता और दादी पर भी मुकदमा चलाया जाए। महिला का कहना था कि उस व्यक्ति के परिवार वालों ने भी उसे शादी का भरोसा दिया था, इसलिए वे भी इस झूठे वादे में शामिल हैं। पूरी खबर को पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
