केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा कि वह मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के पक्ष में नहीं है। केंद्र ने यह भी कहा कि उसने केवल संविधान के प्रावधानों की व्याख्या की है, न कि मंदिरों पर नियंत्रण की कोई मांग की है।

यह मामला सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष ‘आस्था बनाम मौलिक अधिकारों’ की बहस के दौरान उठा। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सबरीमाला अयप्पा मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंहवी ने अनुच्छेद 25 और 26 की एक विशेष व्याख्या दी है क्योंकि सरकार मंदिरों को नियंत्रित करना चाहती है।

मेहता ने शंकरनारायणन द्वारा अपने तर्कों की व्याख्या का खंडन करने के लिए पीठ से अनुमति मांगी और कहा, “सरकार मंदिरों को बिल्कुल भी नियंत्रित नहीं करना चाहती है और उन्होंने जो उल्लेख किया वह विशुद्ध रूप से अनुच्छेद 25(1)(ए) की संवैधानिक व्याख्या थी, जो राज्य को किसी भी धर्म की आर्थिक, राजनीतिक और धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने मेहता से पूछा कि क्या उनका यह तर्क कि “सरकार को मंदिरों पर नियंत्रण नहीं रखना चाहिए” वाली केवल हिंदू धार्मिक संस्थानों तक ही सीमित है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जब न्यायालय और वकील संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या कर रहे हों, तो उन्हें “हिंदू, मुस्लिम, ईसाई या किसी अन्य धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता”।

जस्टिस बागची ने कहा कि व्याख्या एक नागरिक के दृष्टिकोण से होनी चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्होंने हिंदू धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म और अन्य संप्रदायों में पाई जाने वाली विविधता का संक्षिप्त विवरण दिया है।

भारत के कई राज्यों में मंदिर का प्रबंधन सरकार की निगरानी में होता है। केरल में त्रावणकोर, कोचीन, मालाबार, गुरुवायूर और कूदलमानिक्यम देवस्वम बोर्ड सहित कई राज्य सरकार के अधीन निकाय लगभग 3,000 मंदिरों का प्रबंधन करते हैं।

तमिलनाडु में हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग 30,000 से ज्यादा मंदिरों का प्रबंधन करता है। आंध्र प्रदेश में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट बोर्ड तिरुपति बालाजी मंदिर का प्रबंधन करता है। कर्नाटक में हिंदू धार्मिक संस्थाएं एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग मंदिरों का प्रबंधन करता है। उत्तराखंड में चारधाम देवस्थानम बोर्ड बद्रीनाथ और केदारनाथ तीर्थस्थलों का प्रबंधन करता है।

‘मुख्यमंत्री जांच में दखल देकर…’, सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC मामले में ममता बनर्जी को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनवरी में आई-पैक के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी में बाधा डालने के लिए कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि उनके कार्यों ने लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया। पढ़ें पूरी खबर।