दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत के ढहने की घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि सरकार इस त्रासदी की जिम्मेदारी से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि करीब 50 युवा छात्र अपने जीवन की शुरुआत के दौर में हैं और उनमें से कई अभी भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। अदालत ने बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए।

‘सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती’

सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से सवाल किया कि राजधानी में ऐसी घटनाएं बार-बार होने के बावजूद इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी त्रासदियां हर कुछ वर्षों में सामने आती हैं और यह बेहद गंभीर स्थिति है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि बचाव अभियान पूरी गंभीरता और तेजी के साथ चलाया जाए।

MCD को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश

हाईकोर्ट ने नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया कि वह उच्चतम स्तर पर जांच करे और यह पता लगाए कि हादसे का शिकार हुई इमारत का निर्माण वैध अनुमति के तहत हुआ था या नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि यदि अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। MCD को यह जानकारी भी देने को कहा गया है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।

PG और छात्र आवास व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अदालत ने दिल्ली में छात्रों के लिए उपलब्ध सरकारी और विश्वविद्यालयी हॉस्टलों की संख्या को लेकर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र प्राइवेट पीजी और अन्य आवासों पर निर्भर हैं। अदालत के अनुसार, कई पीजी इमारतों में निर्माण नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन किया जाता है।

यदि किसी भवन को दो मंजिल बनाने की अनुमति दी जाती है तो कई बार उससे कहीं अधिक मंजिलों का निर्माण कर दिया जाता है। कोर्ट ने आशंका जताई कि सत्य निकेतन में हुआ हादसा भी ऐसे ही नियमों के उल्लंघन का परिणाम हो सकता है। कोर्ट ने पीजी व्यवस्था को और अधिक सख्ती से नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नियामक तंत्र बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

‘मौत और त्रासदी को सनसनीखेज न बनाया जाए’

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार, MCD और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि बचाव अभियान पूरी गति से चल रहा है और सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं।

मेहता ने सोशल मीडिया पर हादसे से जुड़े ऐसे वीडियो प्रसारित किए जाने पर भी चिंता जताई, जिनमें घायल या मलबे में फंसे लोगों को दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौत और त्रासदी को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने इस मुद्दे पर उचित निर्देश जारी करने की संभावना जताई।

PIL में मांगा गया ₹1 करोड़ मुआवजा

यह मामला अनिकेत कुमार गुप्ता द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से हाईकोर्ट के सामने आया है। याचिका में हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग की गई है। इसके अलावा दिल्ली के सत्य निकेतन और अन्य प्रमुख छात्र आवास क्षेत्रों में मौजूद PG, हॉस्टल और छात्र आवासों का व्यापक संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।

याचिका में इमारत गिरने के कारणों की स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग करते हुए मालिकों, बिल्डरों, ठेकेदारों, आर्किटेक्ट्स, स्ट्रक्चरल इंजीनियरों और मरम्मत या निर्माण कार्य में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की बात कही गई है। साथ ही उन सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है, जिन पर भवन नियमों के निरीक्षण और अनुपालन की जिम्मेदारी है।

निर्माण और सुरक्षा मानकों की होगी जांच

PIL में कहा गया है कि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार इमारत गिरने से ठीक पहले वहां मरम्मत, नवीनीकरण या निर्माण से संबंधित काम चल रहा था। ऐसे में अब यह जांच का विषय है कि यह काम कानूनी अनुमति के तहत किया जा रहा था या नहीं।

जांच में भवन के स्वीकृत नक्शे, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र, अग्नि सुरक्षा नियमों और भवन के पीजी या हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल की वैधता जैसे पहलुओं को भी शामिल करने की मांग की गई है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय से इस मामले में जवाब मांगा है। संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि दिल्ली में ऐसे PG में कितने छात्र रहते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से यह भी पूछा गया है कि हर वर्ष कितने छात्र दाखिला लेते हैं और उनमें से कितने छात्रों को विश्वविद्यालय की ओर से हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

MCD को यह बताने का निर्देश दिया गया है कि दिल्ली में पीजी और हॉस्टल जैसी संपत्तियों को नियंत्रित करने के लिए कोई वैधानिक या कार्यकारी नियम मौजूद हैं या नहीं।

भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने की योजना बताने का निर्देश

अदालत ने दिल्ली सरकार से यह भी बताने को कहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए वह क्या कदम उठाने की योजना बना रही है। कोर्ट ने सरकार से छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अदालत की टिप्पणी से साफ है कि मामला केवल एक इमारत के ढहने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास, अवैध निर्माण, भवन सुरक्षा नियमों के पालन और सरकारी निगरानी की व्यापक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

हादसे में कम से कम छह लोगों की मौत

रिपोर्ट के मुताबिक, सत्य निकेतन में हुई इमारत दुर्घटना में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है। घटना के बाद पीजी संचालक के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है। हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को करेगा। तब तक संबंधित सरकारी और नागरिक एजेंसियों को अदालत के निर्देशों के अनुसार अपनी रिपोर्ट और जवाब दाखिल करने होंगे।

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