Tamil Nadu Elections 2026: मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को चेन्नई में आईपीएल मैचों को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के समापन तक स्थगित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। आशंका जताई गई थी कि मैचों के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी अरुल मुरुगन पीठ ने गौर किया कि याचिका दायर होने के बाद एक मैच पहले ही हो चुका था और ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे यह पता चले कि मैच के दौरान कोई उल्लंघन हुआ था। अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग आवश्यक कदम उठा रहा है और अगर कोई उल्लंघन होता है, तो याचिकाकर्ता के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करना खुला है।

जाइए और दूसरे मैच का भी आनंद लीजिए- कोर्ट

बेंच ने कहा, “एक मैच तो खत्म हो चुका है, कुछ हुआ ही नहीं। आपने (याचिकाकर्ता) मैच देखा, है ना? आपको मजा आया, है ना? जाइए और दूसरे मैच का भी आनंद लीजिए।”

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि या तो आईपीएल मैचों को चुनाव के बाद तक स्थगित कर दिया जाए या मैच वाली जगहों पर आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। याचिका में मैचों के दौरान स्टेडियमों के अंदर राजनीतिक प्रतीकों, विज्ञापनों या चुनावी सामग्री के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई थी।

हम यहां कुछ नहीं कर सकते- मद्रास हाई कोर्ट

कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “हम यहां कुछ नहीं कर सकते। यह चुनाव आयोग का मामला है। वे कदम उठा रहे हैं। अगर कोई उल्लंघन होता है, तो आप चुनाव आयोग से संपर्क कर सकते हैं। चुनाव आयोग के समक्ष उल्लंघन का जिक्र करें। अनुमति हमेशा उपलब्ध है। आपको चुनाव आयोग से संपर्क करने से किसने रोका है? आपकी याचिका में कहा गया है कि उल्लंघन न हो, यह सुनिश्चित करें। यह सब आशंका और डर पर आधारित है। मुझे एक भी ऐसा फैसला दिखाएं जहां किसी जनहित याचिका को आशंका या डर के आधार पर स्वीकार किया जा सके। हमने ऐसे कई फैसले दिए हैं जिनमें चुनाव आयोग पहले से ही गठित है और वे हर चीज का ध्यान रख रहे हैं।”

मद्रास हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के आदेश को किया रद्द

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि भगवद् गीता ‘मोरल साइंस’ यानी नैतिक विज्ञान है और पूर्ण रूप से धार्मिक पुस्तक होने के बजाय यह ‘भारतीय सभ्यता’ का हिस्सा है। पढ़ें पूरी खबर…