Legal News: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ कांस्टेबल के ट्रांसफर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सीआरपीएफ जवान ने अपनी पत्नी के प्रसवोत्तर होने और जटिलताओं के चलते ट्रांसफर रोकने की याचिका लगाई थी। वहीं कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी है और कहा है कि ओडिशा में उनका ट्रांसफर हो रहा है। उनकी प्रसवोत्तर पत्नी के लिए चिकित्सा से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
दरअसल, हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शमीमा जहां ने कहा कि सीआरपीएफ कांस्टेबल ने काउंटर इंसर्जेंसी एंड एंटी-टेररिज्म स्कूल, सीआरपीएफ, सिलचर में अपनी वर्तमान पोस्टिंग पर चार साल की सेवा पूरी कर ली है।
उपचार के लिए सभी सुविधाएं उलब्ध
5 जून के आदेश में कहा गया कि न्यायालय याचिकाकर्ता को उड़ीसा में अपनी पोस्टिंग के स्थान पर कार्यभार संभालने का निर्देश देता है और उसे अपनी पत्नी के चिकित्सा उपचार के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उक्त स्थान पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। न्यायमूर्ति शमीमा जहां ने सीआरपीएफ कांस्टेबल की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसके तबादले के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
- काउंटर इंसर्जेंसी एंड एंटी-टेररिज्म स्कूल में तैनात सीआरपीएफ के एक कांस्टेबल को 22 दिसंबर, 2025 को एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें उन्हें उनकी वर्तमान पोस्टिंग से ओडिशा में 202 बटालियन कोबरा यूनिट में स्थानांतरित किया गया था।
- याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया था कि वह वर्तमान पदस्थापन पर अपनी पूरी क्षमता से अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा था।
- इसके अलावा उन्होंने बताया था कि उनकी पत्नी ने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया है और वह प्रसवोत्तर समस्याओं से पीड़ित हैं।
- उन्होंने कहा कि उपर्युक्त कारण से उनके और परिवार के लिए उड़ीसा में उनकी पोस्टिंग के बारे में उनसे संपर्क करना मुश्किल था।
- उन्होंने इस संबंध में एक निवेदन दाखिल किया कि इन परिस्थितियों में उनके स्थानांतरण पर पुनर्विचार किया जाए।
- अधिकारियों ने उनके अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह वर्तमान पद पर चार साल से अधिक समय से सेवा कर रहे हैं।
- पीड़ित कांस्टेबल ने तब इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने कही उचित इलाज मिलने की बात
गुवाहाटी उच्च न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दा यह था कि क्या सीआरपीएफ कांस्टेबल की नई तैनाती स्थल पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, इस संबंध में निर्देश मांगे जाएं। केंद्र सरकार के वकील बी. शर्मा ने अदालत को सूचित किया कि ओडिशा में स्थानांतरित स्थान पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अदालत ने आगे यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को पहले ही सिलचर में उनके वर्तमान पद से मुक्त कर दिया गया था। सभी तथ्यों और दलीलों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सीआरपीएफ कांस्टेबल को स्थानांतरित स्टेशन पर कार्यभार संभालने का निर्देश दिया और कहा कि उन्हें अपनी पत्नी के चिकित्सा उपचार के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि नए पोस्टिंग क्षेत्र में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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