फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट अपना जवाब देते हुए कहा कि शराब ब्रांड ओल्ड मंक (Old Monk) को रम के तौर पर न ही बेचा जा सकता है और न ही इसकी मार्केंटिंग की जा सकती है।

FSSAI ने हाल ही में न्यूट्रल स्पिरिट में आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग पदार्थ मिलाए जाने का पता चलने के बाद महाराष्ट्र में McDowell’s No. 1 और इस शराब ब्रांड की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

क्यों नहीं कर सकते रम की कैटगरी में शामिल?

FSSAI ने इसका कारण भी कोर्ट में बताते हुए कहा कि इसे न्यूट्रल स्पिरिट और रम फ्लेवरिंग का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम ए. अंखाड की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।

ओल्ड मंक बनाने वाली मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने 9 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट में FSSAI के फैसले को चुनौती दी थी। FSSAI ने इन दोनों कंपनियों की फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया था और इस दौरान उसने तीन चीजों पर आपत्ति जताई थी। इनमें बोतल पर की गई लेबलिंग, शराब का कंपोजिशन (बनाने वाली चीजों) और इसमें इस्तेमाल किए गए फ्लेवर एजेंट शामिल है।

31 अगस्त को भी की गई थी सुनवाई

31 अगस्त को बेंच ने ब्रांड पर तुरंत अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद, निर्माता अपने पैकेजिंग लेबल में बदलाव करने पर सहमत हो गया ताकि “एडेड फ्लेवर” (मिलाया गया स्वाद) साफ़ तौर पर दिखे और “7 साल पुराना ब्लेंडेड” वाला विवरण हटाया जा सके।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि रातोंरात सब कुछ बंद नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने सुनवाई 8 सितंबर तक के लिए टाल दी थी और अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह को FSSAI के निर्देशों के साथ पेश होने को कहा।

नए लेबल कोर्ट में किया जमा

ओल्ड मंक ने गुरुवार यानी 3 अगस्त को लेबल में बदलाव कर और अपनी बोतल के लेबल पर ‘एडेड फ्लेवर’ (मिलाया गया फ्लेवर) को प्रमुखता से दिखाने वाले लेबल कोर्ट में जमा किया। हालांकि, FSSAI का कहना है कि ‘रम जैसा फ्लेवर’ वाली न्यूट्रल स्पिरिट रम नहीं होती है।

31 अगस्त को FSSAI की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट राजशेखर गोविलकर ने इस बात पर आपत्ति जताई कि “प्रोडक्ट को रम बताया गया है”। उन्होंने तर्क दिया, “इसे रम के तौर पर नहीं बेचा जा सकता। न्यूट्रल स्पिरिट में रम का स्वाद मिलाने से बना प्रोडक्ट रम नहीं कहला सकता। इस्तेमाल की गई शब्दावली से ऐसा लगता है कि यह रम जैसा है।”

इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 11 सितंबर तय की है। इस दिन कोर्ट रोक लगाने वाले आदेश को रद्द करने की ओल्ड मंक की याचिका पर सुनवाई करेगा।

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