लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में केंद्र सरकार में मंत्री रहे अजय मिश्रा टेनी और उनके पुत्र आशीष मिश्रा को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। जिसमें बताया कि पूर्व मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनका बेटा लखीमपुर हिंसा के गवाहों को डराने-धमकाने में शामिल नहीं थे और उनके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहन की पीठ को यह भी बताया गया कि लखीमपुर हिंसा मामले की सुनवाई अगले तीन महीनों में पूरी होने की संभावना है। पीठ ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई को स्थगित कर दिया, क्योंकि उन्होंने ट्रायल की प्रगति और उसके समक्ष प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट पर गौर किया। अब यह मामला अगले महीने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

शीर्ष अदालत ने नोट किया कि चार्जशीट केवल अमनदीप सिंह के खिलाफ दाखिल की गई है और जांच से पता चला है कि अजय और आशीष मिश्रा गवाहों को धमकाने में शामिल नहीं थे।

गवाह को धमकी देने का मामला मुख्य मुकदमे में गवाह बलजिंदर सिंह द्वारा उठाई गई शिकायत से सामने आया। जिन्होंने कहा कि उन्हें अपनी गवाही से पीछे हटने के लिए मजबूर करने का प्रयास किया गया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई न करने के लिए फटकार लगाने के बाद ही लखीमपुर के सहायक पुलिस अधीक्षक पंजाब के मुक्तसर गए, जहां सिंह ठहरे हुए थे और उनका बयान दर्ज किया।

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला?

आशीष मिश्रा पर आरोप है कि उसके काफिले की गाड़ियों ने अक्टूबर 2021 में लखीमपुर में कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुचल दिया था और इसमें चार लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद गुस्साए किसानों ने चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मार डाला गया। इस हिंसा में एक पत्रकार की भी जान गई थी।

आशीष मिश्रा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ देव ने अदालत से कहा कि ताजा स्थिति रिपोर्ट से पता चलता है कि गवाहों के डराने-धमकाने की अलग एफआईआर की जांच पूरी हो गई है और अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष में से कोई भी इसमें शामिल नहीं पाया गया। पीठ ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की ताजा स्थिति पर भी ध्यान दिया, जिसमें 62 गवाहों की गवाही शेष है। कोर्ट को बताया गया कि ट्रायल तीन महीने में पूरा हो सकता है।

‘पूरे देश को स्थिर रखना चाहते हैं’, सुप्रीम कोर्ट ने देश की पहली नाइट सफारी को दी हरी झंडी

राज्य सरकार द्वारा परियोजना की मंजूरी के लिए दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने पाया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) पहले ही हरी झंडी दे चुकी है। अदालत ने यह भी कहा कि चिड़ियाघर “पुराने जमाने” के हैं। पीठ ने आलोचकों से पूछा कि क्या वे “पूरे देश को स्थिर” रखना चाहते हैं। पढ़ें पूरी खबर।