Legal News: हमारे देश में संवैधानिक अदालतों (हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट) के जजों के लिए एक बेहद सख्त नैतिक नियम है। पद पर रहते हुए वे किसी भी सरकार, कंपनी या निजी पक्ष के साथ कोई व्यापारिक या व्यावसायिक संबंध नहीं रख सकते लेकिन, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज और मणिपुर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) सिद्धार्थ मृदुल का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नैतिक आचार संहिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि न्यायमूर्ति मृदुल अपने 16 साल के न्यायिक कार्यकाल के दौरान चुपके से एक एलपीजी (LPG) गैस वितरण एजेंसी चलाते रहे। मामला सामने आने के बाद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने उनकी डीलरशिप को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल ने साल 1986 में दिल्ली हाई कोर्ट से एक वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। मार्च 2008 में वे इसी अदालत में जज नियुक्त हुए और अक्टूबर 2023 में प्रमोट होकर मणिपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। वे पिछले साल 21 नवंबर, 2024 को इस पद से सेवानिवृत्त हुए।

चौंकाने वाली बात यह है कि साल 1984 में बीपीसीएल ने उन्हें ‘किचन फ्लेम’ नाम से एक एलपीजी गैस एजेंसी आवंटित की थी। जज बनने के बाद भी यह एजेंसी बंद नहीं हुई। रिकॉर्ड्स के मुताबिक, जज के पद पर रहते हुए भी न्यायमूर्ति मृदुल और बीपीसीएल के बीच इस गैस एजेंसी के समझौते (एग्रीमेंट) का रिन्यूअल (नवीनीकरण) होता रहा। यह रिन्यूअल साल 2010, 2015 और हाल ही में मई 2025 और सितंबर 2025 में भी किया गया, जिसकी वैधता साल 2030 तक है। अंतिम समझौते के स्टांप पेपर पर खुद जज साहब की तस्वीर और हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।

जब दूसरों को नोटिस भेजने वाले जज को खुद मिला नोटिस

न्यायपालिका में पारदर्शिता के तहत जजों को कंपनियों में अपने शेयरों या व्यावसायिक हितों की घोषणा करनी होती है ताकि ‘हितों के टकराव’ से बचा जा सके लेकिन न्यायमूर्ति मृदुल ने ऐसा नहीं किया। दिसंबर 2025 में एक आम नागरिक की शिकायत के बाद बीपीसीएल हरकत में आई।

सरकारी तेल कंपनी ने पाया कि जज साहब ने बिना किसी लिखित अनुमति के न्यायिक पद पर रहते हुए कमर्शियल बिजनेस जारी रखा, जो कि सीधे तौर पर अनुबंध (कांट्रैक्ट) का उल्लंघन है।

इसके बाद बीपीसीएल ने जज साहब को सफाई देने के लिए नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने किसी भी नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। नतीजतन, 6 जुलाई, 2026 को बीपीसीएल ने ‘किचन फ्लेम’ की डीलरशिप को पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया।

बड़े लोगों के विवाद में फंसी एक बेबस विधवा

इस पूरे मामले में एक दुखद मानवीय पहलू भी शामिल है। ‘किचन फ्लेम’ गैस एजेंसी का असल कामकाज दीपक यादव नाम के व्यक्ति संभाल रहे थे। दीपक यादव की मृत्यु के बाद उनकी विधवा मोनिका यादव इस एजेंसी के मालिकाना हक को अपने नाम पर ट्रांसफर (पुनर्गठन) करवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

मोनिका यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी से नियमों का पालन किया है। लेकिन पूर्व जज की लापरवाही और बीपीसीएल की सालों की चुप्पी के कारण आज उनका पूरा परिवार भुगत रहा है और उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बीपीसीएल को दो महीने के भीतर मोनिका की अर्जी पर फैसला करने का निर्देश दिया है।

यह भी पढ़ें: विक्टोरिया हाउस के सामने रैली नहीं कर पाएंगी ममता, कलकत्ता हाई कोर्ट ने नहीं दी इजाजत

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के सामने अपनी राय व्यक्त की है। पार्टी ने कहा कि अगर उन्हें 21 जुलाई को एस्प्लेनेड स्थित विक्टोरिया हाउस के सामने रैली आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो उन्हें दक्षिण कोलकाता के बिड़ला तारामंडल के सामने रैली आयोजित करने की इजाजत दी जाए। पढ़िए पूरी खबर…