Delhi High Court News: पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को जब दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष आबकारी नीति मामले की सुनवाई से उन्हें अलग हो जाने की अपील की, न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा, “मैंने खुद को सुनवाई से अलग रखने (recusal) से जुड़े कानून के बारे में बहुत कुछ सीखा। मेरी जिदगी में पहली बार किसी ने मुझसे खुद को सुनवाई से अलग रखने के लिए कहा है। लेकिन मैंने इसके बारे में बहुत कुछ सीखा। मुझे उम्मीद है कि मैं एक अच्छा फैसला दे पाऊंगी।”
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (ABAP) के साथ उनके वैचारिक जुड़ाव की संभावना की ओर इशारा किया था। ABAP वकीलों का एक ऐसा संगठन है, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक सहयोगी संगठन माना जाता है।
कौन हैं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा?
दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इंग्लिश लिटरेचर में बीए (ऑनर्स) किया था। 1991 में उन्होंने एलएलबी की डिग्री हासिल की और 2004 में एलएलएम की उपाधि प्राप्त की। जस्टिस शर्मा के पास मार्केटिंग मैनेजमेंट, विज्ञापन और जनसंपर्क में डिप्लोमा भी है।
मार्च 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट में जज के तौर पर पदोन्नत होने से पहले, वह राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज-सह-स्पेशल जज (CBI) थीं। नवंबर 2019 में, उन्हें प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज (उत्तरी जिला) नियुक्त किया गया था। वह 24 साल की उम्र में मजिस्ट्रेट बनीं और 11 साल बाद सेशंस जज। दिल्ली जिला अदालतों में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई तरह की अदालतों की अध्यक्षता की।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कई किताबें भी लिखी हैं। उनकी पहली पुस्तक, ‘डोंट ब्रेक आफ्टर ब्रेक-अप’, उन महिलाओं को मार्गदर्शन प्रदान करती है जिन्होंने अविवाहित रहने का विकल्प चुना है या जिन्होंने कठिन ब्रेक-अप का अनुभव किया है। ‘बियॉन्ड बागबान’ वरिष्ठ नागरिकों द्वारा सामना की जाने वाली भावनात्मक और वित्तीय चुनौतियों का विश्लेषण करती है, जबकि ‘तुम्हारी सखी’ महिलाओं को उनके अधिकारों और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के महत्व के बारे में जागरूक करने का प्रयास करती है। अपनी चौथी रचना, ‘लव फुल सर्कल’ के साथ, जस्टिस शर्मा ने कथा लेखन में कदम रखा।
केजरीवाल ने दी दलीलें
जस्टिस शर्मा का नाम विवादों के केंद्र में तब आया जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने याचिका दायर कर खुद को इस मामले से अलग करने का फैसला सुनाया। केजरीवाल ने दावा किया कि निचली अदालत द्वारा तीन महीने से ज्यादा की सुनवाई के बाद पारित बरी करने के आदेश को हाई कोर्ट ने केवल पांच मिनट की सुनवाई में गलत घोषित कर दिया।
केजरीवाल ने कहा, “मैं सचमुच हैरान था और मुझे संदेह होने लगा, मुझे गंभीर आशंकाएं होने लगीं कि क्या अदालत पक्षपातपूर्ण है और क्या मुझे यहां न्याय मिलेगा।” केजरीवाल ने आगे तर्क दिया कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका सहित पांच मामलों में न्यायाधीश का आदेश लगभग फैसला सुनाने के समान था।
केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा से अपने मामले से हटने की मांग करते हुए पक्षपात की आशंका जताई और कहा कि उनके द्वारा न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में चल रहे सांसद/विधायकों से संबंधित आपराधिक मामलों के विश्लेषण से पता चलता है कि केवल दो मामले ऐसे हैं, जिनमें अदालत मामलों की सुनवाई तेजी से कर रही है।
केजरीवाल ने राजनीतिक आधार पर पक्षपात की आशंका जताते हुए, साथ ही सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर भी अपनी आशंका व्यक्त की, और कहा कि वह “इस अदालत के हितों के टकराव को दर्शाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर इस अदालत के पक्षपात से बुरी तरह प्रभावित हैं और इसकी आशंका जताते हैं।”
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने किन-किन मामलों को निपटाया
2023 के एक रेप मामले में तीन पुरुषों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि बलात्कार के झूठे आरोप उन लोगों पर जीवन भर के लिए अमिट घाव छोड़ जाते हैं जिन पर गलत तरीके से आरोप लगाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामले न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं, जिसका उद्देश्य यौन हिंसा के वास्तविक पीड़ितों की रक्षा करना है।
15 दिसंबर 2025 के आदेश में कहा गया, “प्रतिष्ठा की हानि, कारावास, सामाजिक कलंक और मनोवैज्ञानिक आघात, जो किसी ऐसे आरोपी को भुगतना पड़ता है जिसे अंततः झूठा फंसाया गया पाया जाता है, ऐसे घाव छोड़ सकता है जो जीवन भर न भरने वाले हों, ठीक उसी तरह जैसे गरिमा और शारीरिक अखंडता का उल्लंघन यौन उत्पीड़न के वास्तविक मामलों में गहरे और स्थायी घाव छोड़ता है।”
‘जाली दस्तावेजों से देश की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है’
फरवरी 2026 में फर्जी ट्रेवल डॉक्यूमेंट और अवैध विदेशी यात्रा को सुविधाजनक बनाने से जुड़े एक संगठित रैकेट में एक प्रमुख सूत्रधार के रूप में काम करने के आरोपी एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए , न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अवैध प्रवासन व्यक्तियों के बीच एक निजी विवाद तक सीमित मामला नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के आचरण से इसमें शामिल लोगों को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ता है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में देश की प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।
‘गृहिणी खाली नहीं बैठती’
वहीं एक वैवाहिक विवाद में भरण-पोषण देने से संबंधित एक मामले से निपटते हुए, जस्टिस शर्मा ने टिप्पणी की कि यह धारणा कि गैर-कमाई करने वाला जीवनसाथी आलसी है, घरेलू योगदान की गलतफहमी को दिखाती है। फरवरी में जारी आदेश में कहा गया, “एक गृहिणी ‘बेकार नहीं बैठती’; वह ऐसा श्रम करती है जिससे कमाने वाला पति या पत्नी प्रभावी ढंग से काम कर सके। भरण-पोषण के दावों का निर्णय करते समय इस योगदान की अनदेखी करना अवास्तविक और अन्यायपूर्ण होगा।”
‘सार्वजनिक सड़कें मौत के जाल नहीं हो सकतीं’
जनकपुरी रोड के बीचों-बीच खोदे गए 14 फुट गहरे सीवर के गड्ढे में गिरने से प्राइवेट बैंक कर्मचारी की मौत के आरोपी दो लोगों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने टिप्पणी की कि आम जनता के अनमोल जीवन को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। जस्टिस शर्मा ने 25 फरवरी, 2026 को कहा, “इतना कहना ही काफी है कि व्यस्त सड़कों पर बुनियादी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित किए बिना खुदाई का काम करते समय आम जनता के अनमोल जीवन को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।”
रेखा गुप्ता ने केजरीवाल पर बोला हमला
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय राजधानी के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने केजरीवाल पर बीते दिनों हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया। शराब मामले में जिस तरह पूर्व मुख्यमंत्री ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी बातें रखीं, उस पर रेखा गुप्ता ने टिप्पणी की। पढ़ें पूरी खबर…
