Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक गौहत्या मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर इतनी बढ़ा-चढ़ाकर और कहानी की तरह लिखी गई है कि वह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है।

जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने एफआईआर में लिखी गई बातों पर सवाल उठाए। बेंच ने सवाल करते हुए कहा कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस वास्तविक घटनाओं के आधार पर एफआईआर तैयार कर रही थी या केवल फिल्मी स्क्रिप्ट से नाटकीय संवादों को दोहरा रही थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “या तो पुलिसकर्मियों के सामने कोई स्क्रिप्ट रखी होती है और वे उसमें कुछ मामूली बदलाव करके उसे अपना लेते हैं या फिर पुलिसकर्मियों में कुछ गंभीर गड़बड़ी है, जिसके चलते धड़ल्ले से ऐसी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं जो फिल्मी स्क्रिप्ट से ली गई लगती हैं। इस लेवल पर हमें कुछ और कहने की जरूरत नहीं है।”

क्या है पूरा मामला?

अब पूरे मामले की बात करें तो कोर्ट हरदोई जिले के ताडियावां पुलिस स्टेशन में 2 जनवरी को दर्ज की गई एफआईआर को चुनौती देने वाली अलीम नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एफआईआर के अनुसार, थाने के पुलिस अधिकारी को एक वीडियो मिला जिसमें कथित तौर पर गौहत्या दिखाई गई थी। वीडियो देखते समय उन्हें एक गुप्त सूचना मिली कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति एक कुख्यात गौ तस्कर है जिसने पहले भी इसी तरह के अपराध किए हैं और वह पास ही में एक और ऐसा ही अपराध करने वाला है।

पुलिस की टीम मुखबिर की तरफ से बताए गए मकान की ओर पहुंची। जैसे ही वह पास में पहुंची तो किसी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। पुलिस आ गयी है, भागो। फिर एक दूसरी आवाज ने कथित तौर पर चेतावनी दी, “पुलिस वाले बिना मारे पीछा नहीं छोड़ेंगे।” एफआईआर में आगे बताया गया है कि पुलिस दल पर गोली चलाई गई और एक सब-इंस्पेक्टर बाल-बाल बच गया। गोली कान के पास से निकल गई। बताया जाता है कि एसएचओ ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से जवाबी फायरिंग की, जिसके बाद कथित तौर पर किसी ने चिल्लाकर कहा, “हाय गोली लग गई।”

पुलिस को जमीन पर एक घायल व्यक्ति मिला, जिसने अपना नाम एडू बताया। उसने कथित तौर पर जुर्म कबूला। साथ ही दावा किया कि अलीम समेत अन्य लोग भाग गए थे। बरामद किए गए मवेशियों को दूसरे गांव के एक व्यक्ति को सौंप दिया गया। इसी बीच, अलीम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एफआईआर को चुनौती दी।

हरदोई एसएसपी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

हाई कोर्ट ने कहा कि एफआईआर की भाषा से गंभीर संदेह पैदा होता है। इसने गौहत्या के एक अन्य मामले में दर्ज इसी तरह की एफआईआर का हवाला दिया। न्यायालय ने पाया कि पुलिस पर गोली चलाने वाला एकमात्र व्यक्ति खुद घायल आरोपी था। ऐसा कोई स्पष्ट आरोप नहीं था जिससे यह पता चले कि अलीम गोलीबारी में या बीएनएस के तहत किसी भी कृत्य में कैसे शामिल था। एफआईआर में कई खामियां पाते हुए कोर्ट ने हरदोई के एसएसपी को तीन हफ्ते के अंदर हलफनामा दाखिल करके खामियों पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो उन्हें रिकॉर्ड के साथ खुद उपस्थित होना होगा।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कैदी की हिरासत में अप्राकृतिक तरीके से मौत होती है, तो उसके लिए पूरी तरह से राज्य सरकार जिम्मेदार होगी, भले ही वह मृत्यु आत्महत्या ही क्यों न हो। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…