Madras High Court News: मद्रास हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि तमिलनाडु में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों से पता चलता है कि लोगों को उम्मीदवारों की जाति या समुदाय पर ध्यान दिए बिना वोट देने के लिए मनाया जा सकता है।

मदुरै बेंच के जस्टिस बी. पुगलेन्धी ने यह बात तिरुनेलवेली में कथित ‘ऑनर किलिंग’ के बाद अपने बेटे की मदद करने के आरोपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर को जमानत देते हुए कही।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट ने कहा, “तमिलनाडु राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों से पता चला है कि लोगों को उम्मीदवारों की जाति या समुदाय पर विचार किए बिना वोट देने के लिए वास्तव में मनाया जा सकता है। असल में, जाति के कारकों को काफी हद तक दरकिनार करके सरकार बनी है। यह याद रखना चाहिए कि राज्य तभी सच्चे बदलाव का दावा कर सकता है जब लोगों की सोच भी बदले। इसलिए, इस सरकार को लोगों के मन से जाति की भावना को खत्म करने की जिम्मेदारी और पहल करनी चाहिए।”

सरवनन की जमानत अर्जी पर दिया गया आदेश

यह आदेश सरवनन की जमानत अर्जी पर दिया गया। सरवनन, केविन नाम के एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट की कथित ‘ऑनर किलिंग’ के मुख्य आरोपी के पिता हैं। केविन, सरवनन की बेटी के साथ रिलेशनशिप में था।

जस्टिस बी पुगलेन्धी ने कहा कि ऑनर किलिंग जातिवाद का चरम रूप है और कहा कि जातिवाद समाज को बांटता है। कोर्ट ने बताया कि पिछले 10 सालों में तमिलनाडु में ऑनर किलिंग के 59 मामले सामने आए हैं। कोर्ट ने कहा, “लोगों के मन में जातिवाद गहराई तक बैठ गया है और यह पूरे सिस्टम को खराब कर रहा है।”

लोगों के मन में जातिवाद फैला हुआ है- कोर्ट

कोर्ट ने आगे कहा कि जब लोगों के मन में आम तौर पर जातिवाद फैला हुआ है, तो इसके लिए सिर्फ सरवनन या उसके परिवार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा, “चाहे कोई व्यक्ति कितना भी ताकतवर या विशेषाधिकार प्राप्त क्यों न हो, हर कोई किसी न किसी रूप में जातिवाद का सामना कर रहा है। यहां तक कि हम जज भी इससे अछूते नहीं हैं। हमारे आदेशों के पीछे जाति के आधार पर मकसद तलाशे जाते हैं, जबकि मामलों का फैसला मेरिट के आधार पर किया जाता है।”

जस्टिस पुगलेन्धी ने यह भी कहा कि के. कामराज, मुथुरामलिंगम थेवर और वी.ओ. चिदंबरम जैसे नेताओं को अब सांप्रदायिक आधार पर पेश किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि इस सोच को बदलना होगा और सिर्फ राज्य ही ऐसा बदलाव ला सकता है।

कोर्ट ने कहा, “लोगों की इस सोच को बदलना होगा और सिर्फ राज्य ही ऐसा बदलाव ला सकता है। इसके लिए राज्य को मजबूत पहल करनी होगी। हालांकि, कुछ राजनीतिक पार्टियां भी वोट जुटाने के लिए जाति का इस्तेमाल करके इस सामाजिक बुराई को बढ़ावा दे रही हैं।”

जस्टिस के चंद्रू की अध्यक्षता वाली कमेटी का कोर्ट ने किया जिक्र

कोर्ट ने आगे कहा कि जाति-आधारित सोच तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में ज्यादा फैली हुई है। कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस के. चंद्रू की अध्यक्षता वाली एक कमेटी का जिक्र किया, जिसे स्कूली छात्रों के बीच हिंसा के बाद बनाया गया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इसकी सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एससी-एसटी एक्ट जैसे कानूनों से उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले हैं और युवा पीढ़ी की सोच बदलने के लिए स्कूल स्तर से ही सुधार शुरू होने चाहिए।

कोर्ट ने दे दी जमानत

कोर्ट ने कहा, “ऑनर किलिंग एक शर्मनाक काम है।” कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि अपराध करने में सरवनन की सक्रिय भूमिका थी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि वह 10 महीने से जेल में है, जांच पूरी हो चुकी है और उसके खिलाफ कार्यवाही को एक याचिका के जरिये रोक दिया गया है। इसलिए, कोर्ट ने दो जमानतदारों के साथ ₹1 लाख के बॉन्ड पर उसे जमानत दे दी।

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