सुप्रीम कोर्ट ने शादी से पहले शारीरिक संबंधों को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि शादी से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए पूरी तरह से अजनबी होते हैं और उन्हें शारीरिक संबंध बनाने से पहले सावधान रहना चाहिए। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच शादी का झूठा वादा करके बलात्कार करने के आरोपी एक शख्स की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

आरोप है कि इस शख्स ने महिला को यह आश्वासन देकर बहलाया-फुसलाया कि वह उससे शादी करेगा जबकि वह पहले से ही विवाहित था और बाद में उसने एक दूसरी महिला से भी शादी कर ली।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “हो सकता है हम पुराने ख्यालों के हों लेकिन शादी से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं। उनके रिश्ते में चाहे जो भी उतार-चढ़ाव आए, हमें समझ नहीं आता कि वे शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं… आपको बहुत सावधान रहना चाहिए, शादी से पहले किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।”

अदालत से दोषी मौत की सजा का कर रहीं इंतजार, 21 महिलाओं की अनसुनी कहानी

महिला के वकील ने क्या कहा?

महिला के वकील ने अदालत को बताया कि दोनों की मुलाकात 2022 में एक वैवाहिक वेबसाइट पर हुई थी और आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके दिल्ली और बाद में दुबई में कई मौकों पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जस्टिस नागरत्ना ने महिला से पूछा कि उन्हें दुबई जाने की क्या जरूरत थी और यह मामला आपसी सहमति से संबंध बनाने का लगता है।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ”यदि वह इस मामले में इतनी सख्त थीं तो उन्हें शादी से पहले (दुबई) नहीं जाना चाहिए था। हम उन्हें मध्यस्थता के लिए भेजेंगे। ये ऐसे मामले नहीं हैं जिनमें आपसी सहमति से संबंध होने पर मुकदमा चलाया जाए और सजा दी जाए।”

महिला ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि आरोपी के कहने पर ही वह दुबई गई, जहां उसने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और उसकी सहमति के बिना अंतरंग वीडियो रिकॉर्ड किए और धमकी दी कि यदि उसने विरोध किया तो वह इन्हें वायरल कर देगा।

‘संविधान में विश्वास और आस्था को दिखाता है’

हाई कोर्ट, निचली अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका

महिला ने बताया कि बाद में उसे पता चला कि आरोपी ने जनवरी, 2024 में पंजाब में दूसरी महिला से शादी कर ली थी जबकि वह पहले से ही शादीशुदा था। दिल्ली हाई कोर्ट और निचली अदालत ने उस व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आरोपों से प्रथमदृष्टया यह संकेत मिलता है कि विवाह का वादा शुरू से ही झूठा था, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि याचिकाकर्ता पहले से ही विवाहित था और उसने 19 जनवरी, 2024 को दोबारा शादी कर ली थी।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी ने मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

यह भी पढ़ें- ‘चुनाव का कुछ हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाता है’