Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भाटिया ने शुक्रवार को जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, यह कहते हुए कि उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियां मनोबल गिराने वाली थी। जस्टिस भाटिया ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से आग्रह करते हुए कहा कि भविष्य में उन्हें जमानत मामलों की रोस्टर जिम्मेदारी ना दी जाए।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस ने कहा, “जमानत याचिका को माननीय मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने के लिए जारी किया जाता है ताकि इसे किसी अन्य पीठ को सौंपा जा सके, साथ ही माननीय मुख्य न्यायाधीश से यह अनुरोध किया जाता है कि भविष्य में मुझे जमानत का दायित्व न सौंपा जाए।”
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जस्टिस भाटिया की आलोचना की थी और उनके द्वारा पारित जमानत आदेश को हाल के समय में देखे गए सबसे चौंकाने वाले और निराशाजनक आदेशों में से एक बताया था। शुक्रवार को जस्टिस भाटिया ने कहा कि कोई भी न्यायाधीश यह दावा नहीं कर सकता कि उसके आदेश में हाई कोर्ट द्वारा कभी हस्तक्षेप नहीं किया गया है, लेकिन उसके खिलाफ की गई टिप्पणियों का उस पर भयावह प्रभाव पड़ा है।
टिप्पणियों का मुझ पर बहुत गहरा असर हुआ- जस्टिस भाटिया
जस्टिस ने कहा, “यद्यपि यह सर्वविदित है कि कोई भी न्यायाधीश यह दावा नहीं कर सकता कि उसके आदेश को कभी रद्द या उसमें हस्तक्षेप नहीं किया गया है और मुझे भी फैसले के अध्ययन से यह प्रतीत होता है कि जमानत देने का आदेश स्पष्ट रूप से हस्तक्षेप के अधीन था, फिर भी, फैसले में, विशेष रूप से अनुच्छेद 4 और 29 में की गई टिप्पणियों ने मुझ पर बहुत ही निराशाजनक और भय पैदा करने वाला प्रभाव डाला है।”
हालांकि शुक्रवार को न्यायमूर्ति भाटिया के समक्ष सूचीबद्ध जमानत याचिका उस मामले से संबंधित नहीं थी जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को उन्हें फटकार लगाई थी, न्यायाधीश ने कहा कि आवेदन पर सुनवाई करना उचित नहीं होगा।
क्या था पूरा मामला?
अब पूरे मामले की बात करें तो यह एक पिता की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर से यह शुरू होता है। उनकी 22 साल की बेटी सुषमा की शादी 1 मार्च 2025 को आरोपी से हुई थी। शिकायत के अनुसार, शादी के समय काफी दहेज दिया गया था। इसमें 35 लाख रुपये नकद भी शामिल थे। हालांकि, आरोपी और उसके परिवार ने कथित तौर पर चार पहिया वाहन की मांग जारी रखी और महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
25 अप्रैल 2025 की सुबह-सुबह पिता को उनकी बेटी की मौत की सूचना मिली। जब वह ससुराल पहुंचे तो उन्होंने उसकी गर्दन पर चोट के निशान देखे और आरोप लगाया कि दहेज के लिए उसकी हत्या की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि मृत्यु का कारण गला घोंटने से दम घुटना था। जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
दहेज हत्या मामले में आरोपी को जमानत देने के न्यायमूर्ति भाटिया के आदेश पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा था , “विवादित आदेश को सीधे तौर पर पढ़ने से हमें यह समझ में नहीं आता कि हाई कोर्ट क्या कहना चाह रहा है। दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपी को जमानत देने के लिए हाई कोर्ट ने अपने विवेक का प्रयोग किस आधार पर किया? हाई कोर्ट ने क्या किया? हाई कोर्ट ने केवल बचाव पक्ष के वकील की दलीलें दर्ज कीं और उसके बाद यह टिप्पणी की कि आरोपी 27.07.2025 से जेल में था और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, इसलिए वह जमानत का हकदार है। तदनुसार, जमानत मंजूर कर दी गई।” अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का ‘सुरक्षा कवच’, विकास की वेदी पर पर्यावरण की बलि नहीं!
