दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्मी के एक नायब सूबेदार का रिटायरमेंट रोक दिया है। 20 राजपुताना राइफल्स के नायब सूबेदार रमाकांत सिंह ने अपने कमांडिंग ऑफिसर (CO) पर आरोप लगाया है। सूबेदार ने कहा था कि कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें उन तारीखों पर सर्विस बढ़ाने के लिए फायरिंग टेस्ट में हिस्सा लेते और फेल होते हुए दिखाया था, जिन तारीखों को वह असल में छुट्टी पर था।
क्या है मामला?
इसी मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने 27 फरवरी को अपने आदेश में आर्मी को सूबेदार रमाकांत सिंह को 28 फरवरी की तय तारीख पर छुट्टी देने से रोक दिया और रजिस्ट्रार जनरल को एक महीने के दौरान के उनके मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सेल टावर लोकेशन डेटा लेने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता नायब सूबेदार रमाकांत सिंह ने जम्मू और कश्मीर के नौगाम में यूनिट में जरूरी फायरिंग टेस्ट के लिए मौजूद होने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि उनकी यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आनंद ए शिराली ने दावा किया था कि वह फेल हो गए।
जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच नायब सूबेदार रमाकांत सिंह की यूनियन ऑफ़ इंडिया के खिलाफ फाइल की गई रिट पिटीशन (सिविल) पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता नायब सूबेदार रमाकांत सिंह खुद कोर्टरूम में पेश हुए, जबकि कर्नल शिराली और सूबेदार रणवीर सिंह (दोनों उनके सर्विस एक्सटेंशन के लिए स्क्रीनिंग बोर्ड का हिस्सा थे) वर्चुअली शामिल हुए।
कर्नल शिराली ने कोर्ट को बताया कि नायब सूबेदार रमाकांत सिंह ने 2 अगस्त, 2025 को J&K के नौगाम में हुए दिन-रात के फायरिंग टेस्ट में हिस्सा लिया था। जब वह क्वालिफाई नहीं हुए, तो उन्हें 4 अगस्त, 2025 को दूसरा मौका दिया गया। ऑफिसर के मुताबिक नायब सूबेदार के री-टेस्ट में और भी कम नंबर आए और इसलिए उसे डिसक्वालिफाई कर दिया गया और सर्विस एक्सटेंशन के लिए रिकमेंड नहीं किया गया।
सूबेदार के अलग दावे
सूबेदार रणवीर सिंह भी स्क्रीनिंग बोर्ड में थे। उन्होंने कोर्ट के सामने साफ तौर पर कन्फर्म किया कि रमाकांत सिंह दोनों तारीखों पर फिजिकली मौजूद थे और उन्होंने फायरिंग टेस्ट दिया था। हालांकि याचिकाकर्ता सूबेदार ने बिल्कुल अलग बात कही। उन्होंने कहा कि वह 31 मई, 2025 से 11 जुलाई, 2025 तक बरेली में लीडर मैनेजमेंट ट्रेनिंग ले रहे थे। इसके तुरंत बाद वह 13 जुलाई, 2025 से 11 अगस्त, 2025 तक मंज़ूर छुट्टी पर चले गए और उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर ज़िले के दीनापुर में अपने होमटाउन में रहे। उन्होंने कहा कि इस दौरान वह J&K के नौगाम में अपनी यूनिट में कभी नहीं गए।
अपने दावे को साबित करने के लिए सूबेदार ने छुट्टी के दौरान कैश जमा करने और KYC अपडेट के लिए गाज़ीपुर के एक बैंक में कई बार जाने का ज़िक्र किया। उन्होंने अपने एक्टिव मोबाइल नंबर भी बताए और साफ किया कि उनकी पुरानी बैंक पासबुक पर दिख रहे एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल उन्होंने 2015 से नहीं किया है।
कोर्ट ने क्या कहा?
अलग-अलग बातें रिकॉर्ड करने के बाद कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की मौजूदगी की सच्चाई मोबाइल लोकेशन डेटा से वेरिफ़ाई की जा सकती है। इसलिए कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे 13 जुलाई, 2025 से 11 अगस्त, 2025 तक के पूरे समय के लिए तीन एक्टिव मोबाइल नंबरों के CDR और सेल टावर लोकेशन चार्ट संबंधित सर्विस प्रोवाइडर्स से मांगें और उन्हें रिकॉर्ड में रखें।
बेंच ने यह भी साफ किया कि डिस्चार्ज के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा सिर्फ इसलिए दी जा रही है क्योंकि आगे की कार्रवाई के लिए सूबेदार की फिजिकल मौजूदगी जरूरी है और अगर पिटीशन आखिरकार खारिज हो जाती है तो याचिकाकर्ता को कोई इक्विटी नहीं मिलेगी। सूबेदार से कोर्ट में ऑर्डर की एक कॉपी पर साइन करने के लिए कहा गया, ताकि यह साबित हो सके कि दर्ज किया गया बयान सही है।
सेल टावर डेटा से पता चलेगी सच्चाई
मामले की सुनवाई 19 मार्च के लिए रीशेड्यूल की गई है। तब तक नायब सूबेदार रमाकांत सिंह सर्विस में बने रहेंगे। यह मामला एक ऐसी दुर्लभ स्थिति को दिखाता है जहां एक सैनिक के क्वालिफाइंग टेस्ट में हिस्सा लेने के आर्मी स्क्रीनिंग बोर्ड के ऑफिशियल रिकॉर्ड को खुद सैनिक छुट्टी के रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल लोकेशन सबूतों के आधार पर सीधे चुनौती दे रहा है। मामले की सच्चाई काफी हद तक सेल टावर डेटा पर निर्भर करेगी, जिसे कोर्ट ने अब मांगा है। पढ़ें दिल्ली हाई कोर्ट ने क्यों गृहिणियों के अधिकारों को दी नई मजबूती
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