दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार द्वारा दायर जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस और मृतक पहलवान सागर धनखड़ के परिवार को नोटिस जारी किया है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ मामले की अगली सुनवाई 4 मई को करेगी।
ट्रायल कोर्ट ने 6 फरवरी 2026 को इस मामले में सुशील कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया। यह मामला वर्ष 2021 में जूनियर पहलवान सागर धनखड़ की हत्या से जुड़ा है, जिसमें सुशील कुमार समेत कई लोगों पर आरोप है।
न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को मामले पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत ने रिकार्ड पर लिया कि हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में जमानत देने के आदेश को अगस्त, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।
साथ ही अदालत ने मौखिक रूप से आरोपित सुशील पहलवान की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता से पूछा कि एक बार सुप्रीम कोर्ट ने कोई राय बना ली है, तो आप हाई कोर्ट से क्या उम्मीद करते हैं? इसके जवाब में सुशील की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि जमानत याचिका पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि ट्रायल में सभी सरकारी गवाहों से पूछताछ हो चुकी है। इस तर्क का पुलिस और धनखड़ के परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील दोनों ने विरोध किया है।
सुशील कुमार को मई 2021 में छत्रसाल स्टेडियम में कथित हमले के बाद गिरफ्तार किया गया था, जहां धनखड़ को देर रात हुई झड़प में जानलेवा चोटें आई थीं। यह झड़प कथित तौर पर संपत्ति विवाद से जुड़ी थी। पुलिस ने कुमार को मुख्य आरोपी बनाते हुए सुशील पर हत्या और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया है।
आवासीय क्षेत्रों में खुले कूड़ेदान और पब्लिक यूरिनल को लेकर हाई कोर्ट सख्त
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि आवासीय क्षेत्र में खुले कूड़ेदान और सार्वजनिक मूत्रालय उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि स्वस्थ वातावरण का अभाव याचिकाकर्ता के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन करता है। न्यायालय में यह याचिका एक अधिवक्ता ने दायर की थी, जिसके घर के बाहर कूड़ेदान और सार्वजनिक मूत्रालय बनाया गया था। पढ़ें पूरी खबर।
