दिल्ली हाई कोर्ट ने एक आरोपी युवक को जमानत दे दी। आरोपी पर अपनी नाबालिग प्रेमिका के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप था और उसके खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत केस दर्ज किया गया था।

हाई कोर्ट ने मामले को सहमति पर आधारित रोमांटिक रिश्ता मानते हुए कहा कि आरोपी युवक दो साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है। इसके अलावा, लड़की के अस्थि-परीक्षण (हड्डियों की जांच) से यह सामने आया कि जब दोनों के बीच संबंध बने थे, तब लड़की बालिग होने के बहुत करीब थी। इन दोनों बातों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने माना कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए और इसलिए उसे राहत दी गई।

जस्टिस विकास महाजन ने मंगलवार को टिप्पणी करते हुए कहा, “एफआईआर में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि पीड़िता एक लड़के (याचिकाकर्ता) की मित्र है। इसके अलावा, धारा 161 और 164 दंड प्रक्रिया के तहत पीड़िता के बयान और उससे की गई जिरह से पता चलता है कि वह याचिकाकर्ता को पसंद करती थी और अपनी मर्जी से उसके साथ आगरा गई थी। इस प्रकार, यह याचिकाकर्ता और पीड़िता के बीच प्रेम संबंध का मामला प्रतीत होता है।’

कोर्ट ने साफ कहा कि कानून के मुताबिक किसी नाबालिग की यौन संबंधों के लिए दी गई सहमति मान्य नहीं होती। लेकिन इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अगर लड़की की उम्र 17 साल मानी जाए, तो पहली नजर में वह इतनी समझदार और मानसिक रूप से परिपक्व दिखती है कि अपने फैसले समझ सके।

अदालत ने माना कि लड़की और युवक के बीच एक सहमति पर आधारित रोमांटिक रिश्ता था और यही बात जमानत देने के लिए युवक के पक्ष में जाती है। इस दौरान हाईकोर्ट ने अपने एक पुराने फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि पॉक्सो कानून का मकसद कभी भी युवा लड़के-लड़कियों के बीच सहमति से बने प्रेम संबंधों को अपराध बनाना नहीं था।

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अदालत ने साफ कहा कि यह मामला ऐसा नहीं है, जिसमें पीड़िता के साथ किसी तरह की हिंसा या क्रूरता हुई हो। कोर्ट ने यह भी बताया कि पॉक्सो कानून के मामलों में, जब पीड़िता की उम्र अस्थि आयु परीक्षण (हड्डियों की जांच) के आधार पर तय की जाती है, तो रिपोर्ट में बताई गई उम्र की ऊपरी सीमा को ही उसकी उम्र माना जाना चाहिए। इसलिए इस मामले में पीड़िता की उम्र 17 साल मानी जानी चाहिए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां मामले के अंतिम फैसले पर असर डालने के लिए नहीं हैं, बल्कि सिर्फ जमानत पर विचार करते समय की गई हैं। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता, उसकी मां और अन्य गवाहों से पहले ही पूछताछ हो चुकी है, इसलिए आरोपी के द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है।

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