जस्टिस स्वर्णकांता मामले को लेकर अब दिल्ली हाईकोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कई लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
दायर याचिका में अरविंद केजरीवाल, पत्रकार रविश कुमार और कई नेताओं के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है। आरोप है कि इन्होंने सोशल मीडिया पर कोर्ट की कार्यवाही की रिकार्डिंग पब्लिश की थी, जब अरविंद केजरीवाल, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने उन्हें (जस्टिस स्वर्णकांता) खुद को केस से अलग करने वाली अर्जी पर बहस कर रहे थे।
किन-किन लोगों का याचिका में नाम?
बार एंड बेंच कानूनी वेबसाइट के मुताबिक, याचिका में अरविंद केजरीवाल और रवीश कुमार के अलावा, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, आप नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, साथ ही संजीव झा, पुरनदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार को कर सकता है। यह याचिका वकील वैभव सिंह की ओर दायर की गई है। यह याचिका एक जनहित याचिका (PIL) के तौर पर दायर की गई है और याचिका में पब्लिश किए गए वीडियो को भी हटाने की भी मांग की गई है।
जस्टिस स्वर्णकांता के केस से हटने की याचिका हुई खारिज
इससे पहले दिल्ली की शराब नीति केस से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाने की अरविंद केजरीवाल और अन्य की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका पर खुद सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कोर्ट धारणाओं का मंच नहीं हो सकता, अगर यह कोर्ट बिना किसी ठोस कारण के इस मामले से हटती है तो इससे उन आरोपों को मजबूती मिल जाएगी जिनका कोई ठोस आधार नहीं है।
उन्होंने कहा कि याचिकाओं में दिए गए तर्क अटकलों पर आधारित हैं, अगर हम स्वीकार करें तो या एक परेशानी वाला मिसाल बनेगा। आगे उन्होंने कहा, “मैंने अपने सामने आए सभी सवालों पर निडर होकर फैसला किया है, इस कोर्ट को आरोपों और इशारों के बोझ से दबाया नहीं जा सकता। कोर्ट जब भी जरूरत होगी, अपने लिए खड़ी होगी, यह भले ही मुश्किल क्यों न लगे। ऐसे में मामले से हटना समझदारी नहीं बल्कि अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ने और सरेंडर करने जैसा होगा।”
हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली शराब नीति मामले को लेकर जस्टिस स्वर्ण कांता के खिलाफ निष्पक्ष नहीं होने का आरोप लगाया। जिसका वीडियो भी अरविंद केजरीवाल, रवीश कुमार समेत कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
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दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है। जिसमें केजरीवाल ने दिल्ली शराब नीति मामले से खुद को अलग करने के लिए कहा था। अब इसको लेकर काफी चर्चा हो रही है। सवाल यह है कि अगर किसी जज ने पहले किसी मामले में शुरुआती राय दी है, तो क्या उसे पक्षपात मानकर उस केस से हट जाना चाहिए? इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय एस ओका बताया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
