Delhi News: दिल्ली की एक अदालत ने माना है कि एक पुरुष द्वारा एक महिला से कौन से वाले पापा? कहना कोई मासूम सवाल नहीं था, बल्कि उसकी निष्ठा और उसके बच्चे के पितृत्व पर यौन-अपमानजनक कटाक्ष था, और उसे उसकी गरिमा आहत करने के लिए दोषी ठहराया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट मोक्ष बैंस ने कहा कि महिला द्वारा अपनी तीन साल की बेटी से देखो पापा आ गए कहने पर की गई टिप्पणी का मतलब यह हो सकता है कि बच्चे के पिता के तौर पर एक से ज्यादा पुरुषों का जिक्र किया जा सकता है।

‘खास हालत से निकलता मतलब’

अदालत ने कहा कि शब्दों के मायने केवल उनके शाब्दिक अर्थ से ही नहीं, बल्कि उन खास हालात से भी निकलता है, जिनमें वे कहे गए थे। अदालत ने कहा, “इस तरह का आरोप सिर्फ बदतमीजी या हल्के-फुल्के ताने से कहीं ज्यादा गंभीर है और यह किसी महिला की गरिमा और शालीनता को ठेस पहुंचाने वाला है।”

अदालत ने गिरधारी लाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया। यह धारा ऐसे शब्दों, इशारों या हरकतों से संबंधित है जिनका मकसद किसी महिला की गरिमा का अपमान करना हो। दोषी को अभी सजा सुनाई जानी बाकी है।

क्या है पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 23 मार्च, 2021 को हुई थी, जब प्रियंका गुप्ता अपनी तीन साल की बेटी को उसके पिता के पास छोड़ने के लिए अपने घर के बाहर सड़क पर जा रही थीं।

इलाके में कपड़े प्रेस करने वाला गिरधारी लाल सड़क के कोने पर बैठा था, तभी एक महिला ने अपनी रोती हुई बेटी को यह कहकर चुप कराने की कोशिश की, देखो पापा आ गए, रोओ मत। लाल ने तुरंत कहा, कौन से वाले पापा? महिला ने उस बात पर ध्यान नहीं दिया और बाद में अपने ससुर को यह बात बताई, जिन्होंने पुलिस को फोन किया।

दलीलों को कर दिया खारिज

अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले पर शक करने के आधार के तौर पर किसी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह की गैर-मौजूदगी की दलील को भी खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता घटना की प्रत्यक्ष गवाह थी और उस टिप्पणी के बारे में उसकी गवाही अडिग रही।

अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी उचित संदेह के यह साबित कर दिया है कि गिरधारी लाल ने वह टिप्पणी महिला को सुनाने और उसकी गरिमा को आहत करने के इरादे से की थी।

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