Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ कई बार दुष्कर्म के लिए आरोप पत्र समेत एक आपराधिक मुकदमा यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक जबरन संबंध बनाने के आरोप प्रथम दृष्टया टिकने योग्य नहीं हैं। जस्टिस अवनीश सक्सेना ने नीरज कुमार और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं ने BNS की धारा 528 के तहत मौजूदा याचिका दायर करते हुए कथित दुष्कर्म के मामले में 28 फरवरी, 2025 को दाखिल आरोप पत्र रद्द करने की मांग की थी। इस मामले में पीड़िता द्वारा एक दिसंबर, 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी जिसमें कहा गया था कि पीड़िता एक शादीशुदा महिला है और उसका पति सेना में कार्यरत है। पीसीएस की परीक्षा की तैयारी के दौरान उसकी दोस्ती ममता नाम की एक महिला से हो गई थी जिसने उसका परिचय नीरज कुमार (प्रथम याचिकाकर्ता) से कराया था।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि 7 अगस्त, 2022 को नीरज ने अपने जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने के लिए उसे बरेली के राजरानी होटल में बुलाया जहां उसने उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया और इस घटना का वीडियो बनाया। इसके बाद, आरोपी ने वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही उसने यह वीडियो अपने भाई (याचिकाकर्ता दो) को भेजा और उसके भाई ने भी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर संबंध बनाने की कोशिश की और इनकार करने पर उसने पीड़िता के परिजनों को वीडियो भेज दिया।

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रिकॉर्ड पर गौर करने और पीड़िता का बयान सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसने कथित दुष्कर्म के दिन वह वीडियो नहीं देखा। यह विश्वास करना कठिन है कि एक शादीशुदा महिला वीडियो वायरल होने के भय से एक सरकारी अधिकारी के साथ निरंतर यौन संबंध बनाती रही।

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का कोई अश्लील वीडियो उसके परिजनों या पति को भेजे जाने के संबंध में रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही होटल का कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है। ये सभी तथ्य दर्शाते हैं कि पीड़िता ने स्वेच्छा से यह कदम उठाया। साथ ही दूसरे याचिकाकर्ता को भी इस मामले में घसीटा गया क्योंकि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उसने कभी कोई वीडियो स्थानांतरित किया। (भाषा)

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