पंजाब के मानसा की एक कोर्ट ने मंगलवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चल रहे मानहानि के मामले में बार-बार पेश न होने पर फटकार लगाई है। मानसा स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) राजिंदर सिंह नागपाल ने बताया कि सीएम भगवंत मान अक्टूबर 2022 से अब तक एक बार भी अदालत में पेश नहीं हुए हैं, जिसके कारण मामले की आगे की कार्यवाही रुकी हुई है। उस समय उनकी पेशी के दौरान ही आवश्यक जमानत बांड जमा करने पर उन्हें जमानत दी गई थी।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में चंडीगढ़ में एक “महत्वपूर्ण बैठक” के आधार पर मान की ओर से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मांगने वाला एक आवेदन दायर किया गया। इस मामले पर न्यायालय ने 28 अप्रैल (मंगलवार) को विचार किया। उस दिन के लिए छूट देते हुए न्यायालय ने अपने आदेश में निम्नलिखित बातें दर्ज कीं:

पिछली सुनवाई में वर्तमान आरोपी (भगवंत मान) की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश होने की अर्जी को विस्तृत आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था और आरोपी को मंगलवार को इस न्यायालय के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, आज फिर से उक्त आरोपी की ओर से अस्पष्ट आधार पर छूट के लिए अर्जी दाखिल की गई है, जो उसकी पिछली अर्जियों के समान है और न्यायालय की कार्यवाही के प्रति उनके आचरण और रवैये को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। फिर भी, छूट की अर्जी केवल आज के लिए ही स्वीकार की जाती है।

कोर्ट ने आगे चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री 1 मई को अगली सुनवाई की तारीख पर उपस्थित नहीं होते हैं तो दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

न्यायालय ने कहा कि हालांकि, आरोपी के वकील को अगली सुनवाई की तारीख पर आरोपी भगवंत मान की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है। अन्यथा उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी और इस न्यायालय के समक्ष उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए दंडात्मक उपाय अपनाए जाएंगे।

यह मामला 2019 में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक नाजर सिंह मानशाहिया द्वारा मान और कई पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भगवंत मान ने ऐसे बयान दिए थे जिनमें मानशाहिया पर आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के बदले कांग्रेस पार्टी से पैसे लेने का आरोप लगाया गया था।

मानशाहिया ने कहा कि उनके खिलाफ पार्टी बदलने के बदले पैसे लेने के आरोप निराधार थे और उन्हें परेशान करने और बदनाम करने के लिए लगाए गए थे। 2020 में निचली अदालत ने आरोपियों को कार्यवाही का सामना करने के लिए तलब किया था। द ट्रिब्यून से जुड़े पत्रकारों सहित कई सह-आरोपियों ने बाद में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख किया।

मार्च 2025 में हाई कोर्ट ने मानहानि के इरादे का कोई सबूत न मिलने के बाद उनके खिलाफ शिकायत खारिज कर दी। इस आदेश के बाद, कुछ आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी गई। हालांकि, सीएम मान समेत शेष आरोपियों के खिलाफ मामला अभी भी जारी है। ट्रायल कोर्ट ने अब निर्देश दिया है कि 1 मई को अगली सुनवाई की तारीख पर भगवंत मान उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

‘सरकार को मजबूर नहीं कर सकते…’ हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, नया कानून बनाने से इनकार

नफरत फैलाने वाले भाषणों के खिलाफ याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि सजा का निर्धारण पूरी तरह से विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। भड़काऊ बयानबाज़ी (हेट स्पीच) से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कोई भी निर्देश देने से इनकार कर दिया। SC ने कई जगहों पर धर्म संसदों में दिए गए हेट स्पीच के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर।