चंडीगढ़ की एक अदालत ने हरियाणा के पूर्व मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ चल रहे यौन उत्पीड़न मामले को दूसरी जज को ट्रांसफर करने की महिला एथलीट की मांग मान ली है। महिला एथलीट का कहना था कि जिस जज की अदालत में मामला चल रहा था, वे खुद इस केस में गवाह हैं। ऐसे में निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निचली अदालत ने उन्हें पुलिस द्वारा दाखिल चालान की पूरी प्रति नहीं दी।
यह मामला 31 दिसंबर 2022 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। महिला कोच की शिकायत पर चंडीगढ़ पुलिस ने पूर्व ओलंपियन और हरियाणा के पूर्व मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ पीछा करने, अवैध रूप से बंद रखने, यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोप लगाए थे।
इस केस की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) राहुल गर्ग की अदालत में चल रही थी और अगली सुनवाई 31 जनवरी को तय थी। लेकिन इससे पहले, 29 जनवरी को महिला कोच ने अपने वकील समीर सेठी के जरिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचएस ग्रेवाल की अदालत में केस को किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की अर्जी दी थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
महिला कोच ने अपने आवेदन में कहा कि पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट (चालान) देखने पर पता चलता है कि जिस मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला चल रहा है, वही मजिस्ट्रेट (राहुल गर्ग) अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में गवाह नंबर 19 के रूप में दर्ज हैं। ऐसे में वही न्यायाधीश उस मुकदमे की सुनवाई नहीं कर सकते। यह बात पहले भी अदालत के सामने कही जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न्यायाधीश ने खुद को मामले से अलग नहीं किया।
महिला कोच ने यह भी आरोप लगाया कि निचली अदालत ने उन्हें चालान की पूरी कॉपी नहीं दी। उन्होंने साफ कहा था कि वह प्रतियां लेने का पूरा खर्च देने को तैयार हैं, फिर भी उनका अनुरोध गलत तरीके से खारिज कर दिया गया। इससे उन्हें अपने ही मामले में सही ढंग से अदालत की मदद करने में परेशानी हुई।
आवेदन में यह भी कहा गया कि अदालत ने उन्हें उनके अपने बयान की प्रति, जो धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज है, लगातार देने से मना किया। उन्हें अपने बयान को देखने और यह जांचने का मौका भी नहीं दिया गया कि वह रिकॉर्ड से मेल खाता है या नहीं, जबकि यह उनका कानूनी अधिकार है।
महिला कोच का कहना है कि अदालत ने उन्हें अपना पुराना बयान देखे बिना ही गवाही देने का आदेश दे दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे उन्हें नुकसान पहुंचता है। वकील समीर सेठी ने बताया कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सोमवार को इस आवेदन को स्वीकार कर लिया।
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महिला कोच ने 29 दिसंबर 2022 को चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दी थी। इसके दो दिन बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। 1 जनवरी 2023 को भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने नैतिक आधार पर खेल और युवा मामलों का विभाग मुख्यमंत्री को सौंप दिया है। हालांकि, वे राज्य मंत्री (MoS) बने रहे और अपने पास मुद्रण एवं स्टेशनरी विभाग का जिम्मा संभालते रहे।
संदीप सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत और निराधार बताया। उन्होंने 2019 में हरियाणा के पेहोवा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता था। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
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