दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कपिल मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ 2020 में हुए दंगों से जुड़े एक कथित मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने मोहम्मद इलियास द्वारा दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पूर्व न्यायिक निष्कर्षों के मद्देनजर प्राथमिकी दर्ज करना वैध नहीं है।
इससे पहले 10 नवंबर, 2025 को सत्र न्यायालय ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें दिल्ली पुलिस को मिश्रा की दंगों में भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने शुक्रवार को आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की मिश्रा और उनके साथियों के खिलाफ 23 फरवरी, 2020 की घटना के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की दलील विशेष न्यायाधीश के आदेश में दिए गए निष्कर्षों के मद्देनजर इस स्तर पर कानूनी रूप से अस्वीकार्य है।” अदालत ने कहा कि 10 नवंबर, 2025 को विशेष न्यायाधीश द्वारा दिये आदेश के निष्कर्ष ‘अंतिम रूप ले चुके हैं’।
न्यायाधीश ने कहा, “यह अदालत इन निष्कर्ष को मानती है। विशेष न्यायाधीश ने 10 नवंबर, 2025 के आदेश में यह भी कहा था कि बीएनएसएस की धारा 531(2)(ए) इस मामले में लागू नहीं होती है। यह निष्कर्ष भी अंतिम रूप ले चुका है।”
अदालत ने पाया कि कथित घटना की जांच का निर्देश देने वाला एक अप्रैल, 2025 का पिछला आदेश विशेष अदालत ने 10 नवंबर, 2025 को पहले ही रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा, “उपरोक्त निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत दायर अर्जी के आधार पर भाजपा विधायक कपिल मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रार्थना को खारिज किया जाता है।”
हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार, AAP विधायक से जुड़ा है मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत दर्ज एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक नरेश बाल्यान के खिलाफ जांच पूरी करने में विफल रहने के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। पढ़ें पूरी खबर।
(भाषा)
