बेंगलुरु की एक ट्रायल कोर्ट से कर्नाटक विधानसभा के भाजपा विधायक बायराती बसवराज को बिकलू शिव मर्डर केस में बड़ी राहत मिली है स्पेशल जज संतोष गजानन भट ने गुरुवार को बसवराज को दो लाख रुपये के निजी मुचलके जमा करने की शर्त पर जमानत दे दी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत की अन्य शर्तों के अलावा, विधायक को गवाहों को डराने-धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास न करने और बिना अनुमति के देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाने की चेतावनी भी दी गई है। बसवराज को अगले तीन महीनों तक हर महीने पुलिस के सामने पेश होने का भी आदेश दिया गया। अदालत ने पाया कि विधायक से आगे की हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत दी गई।
बसवराज उन लोगों में शामिल है जिन पर शिवप्रकाश उर्फ बिकलू शिवा नामक एक कुख्यात अपराधी की हत्या का आरोप है। जिसकी 15 जुलाई, 2025 को जमीन विवाद के बीच उसके घर के सामने कई हमलावरों ने हत्या कर दी थी।
विधायक को इस मामले में पांचवां आरोपी बनाया गया। उन पर आरोप है कि वह जगदीश के संपर्क में थे, जो एक कुख्यात अपराधी और मुख्य आरोपी है, जिसने कथित तौर पर शिव की मौत से पहले कई बार उनसे मुलाकात की थी और उनके साथ पुरानी दुश्मनी थी।
मृतक बिकलू शिवा और जगदीश रियल एस्टेट उद्योग में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी बताए जाते हैं। विधायक बसवराज पर हत्या के मामले में साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद फरवरी में बसवराज को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में उन्होंने नियमित जमानत के लिए आवेदन किया।
ट्रायल कोर्ट ने 12 मार्च को उनकी याचिका स्वीकार कर ली। जज भट ने कहा कि हत्या के मामले में बसवराज को फंसाने के लिए पेश किए गए सबूत मजबूत नहीं लगते।
आदेश में कहा गया है, “यह हमेशा ध्यान देने योग्य है कि सह-आरोपी का इकबालिया बयान बहुत कमजोर प्रकार का सबूत होता है और यह अधिकतम अभियोजन पक्ष के मामले को केवल आश्वासन दे सकता है और इससे अधिक कुछ भी नहीं माना जा सकता है।”
राज्य द्वारा यह दावा करने के लिए उद्धृत कॉल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कि विधायक और जगदीश हत्या से पहले संपर्क में थे। अदालत ने टिप्पणी की कि कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच मुकदमे के दौरान की जानी चाहिए, न कि जमानत के चरण में।
अदालत ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि बसवराज ने जांच में सहयोग नहीं किया है और हिरासत में पूछताछ के दौरान अस्पष्ट और गुमराह करने वाले जवाब दिए हैं। अदालत ने कहा, “कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, आरोपी को पूछताछ के दौरान भी चुप रहने का अधिकार है। वैसे भी जांच एजेंसी के लिए यह उम्मीद करना उचित नहीं होगा कि आरोपी अपराध स्वीकार करेगा। “
अदालत ने आगे कहा कि बसवराज को भागने का खतरा नहीं माना जा सकता क्योंकि समाज में उनकी गहरी पैठ हैं और उनके भागने की संभावना नहीं है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा भागने के जोखिम के संबंध में प्रस्तुत की गई अंतिम दलील भी इस तथ्य को देखते हुए विचारणीय नहीं रह जाती कि याचिकाकर्ता की समाज में गहरी जड़ें हैं और उसके खिलाफ कोई आपराधिक पृष्ठभूमि भी नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने विधायक को जमानत दे दी।
‘आप ऐसी किसी राहत का नाम बताइए जो आपको नहीं चाहिए’, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की जनहित याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पब्लिक अथॉरिटी की लापरवाही से होने वाली मौतों को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जनहित याचिका काफी व्यापक प्रकृति की है और मांगे गए निर्देशों को लागू करना संभव नहीं होगा। पढ़ें पूरी खबर।
