असम के कार्बी आंगलोंग में बच्चा अपहरण के संदेह में दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या मामले में अब कोर्ट का फैसला आया है। करीब आठ साल बाद सोमवार को सेशन कोर्ट ने हत्या, गैरकानूनी सभा, दंगा और अन्य अपराधों के लिए 20 लोगों को दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष द्वारा उनके खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहने का हवाला देते हुए न्यायालय ने अन्य 25 लोगों को बरी कर दिया।

8 जून 2018 को गुवाहाटी के दो व्यक्तियों जिसमें व्यवसायी अभिजीत नाथ (30) और संगीतकार निलोत्पल दास (29) की कार्बी आंगलोंग जिले के पंजुरी कचारी गांव में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि स्थानीय निवासियों को उन पर बच्चों का अपहरण करने का संदेह था। इस घटना ने असम को झकझोर दिया, जिससे आक्रोश और उनके लिए न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए।

इस घटना के संबंध में मामला दर्ज होने के बाद उसी वर्ष सितंबर में जांच अधिकारी द्वारा 48 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। हालांकि, उनमें से तीन नाबालिग पाए गए और शेष 45 लोगों के खिलाफ मामला अभी भी चल रहा है।

फैसले में कहा गया, “मेरी राय में, यह केवल हत्या का मामला नहीं है। उपलब्ध साक्ष्यों से पूरे इलाके की संलिप्तता सिद्ध होती है। सभी साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद, मैंने पाया है कि दो बच्चा चोरी के पकड़े जाने की खबर सुनकर इलाके के सभी निवासी, विशेषकर पुरुष सदस्य, घटनास्थल पर पहुंच गए थे। यह भी पाया गया है कि आसपास के सभी गांवों के ग्रामीण घटना के तुरंत बाद अपने गांव छोड़कर चले गए थे।”

इसमें आगे कहा गया, “उन्होंने जांच अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं किया। पुलिसकर्मियों सहित सभी गवाहों का कहना है कि उन्होंने घटनास्थल पर 150 से 200 लोगों को इकट्ठा देखा, जिनमें से 50 से 60 लोग दोनों लड़कों पर हमला कर रहे थे, और उनमें से कुछ घातक हथियारों से लैस थे।”

फैसले में अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने 71 गवाहों और एक अदालती गवाह से पूछताछ की, लेकिन केवल पांच गवाहों ने ही 19 आरोपियों की पहचान की। अदालत ने कहा कि पांच प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, “इन 150 से 200 लोगों में से 50 से 60 लोग दो लड़कों पर ‘चोर’ होने का आरोप लगाते हुए उन पर हमला कर रहे थे।”

गवाहों ने बताया कि इलाके में दो “बच्चा अपहरणकर्ताओं” के पकड़े जाने पर हंगामा मच गया था। फैसले में कहा गया है कि इन गवाहों ने बाजार में इसकी सूचना सुनी और फिर उस जगह गए जहां दोनों व्यक्तियों को रखा गया था। अदालत ने कहा कि इन पांचों गवाहों ने बताया कि उन्होंने मोटरसाइकिल की हेडलाइट और मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट की मदद से उनकी पहचान की और जिरह के दौरान उनमें से कुछ ने बताया कि वे घटना से पहले उन्हें (आरोपियों को) जानते थे।

जिन 19 लोगों की पहचान की गई है। उनके अलावा अदालत ने यह भी दर्ज किया है कि एक गैर न्यायिक इकबालिया बयान के माध्यम से 20वें आरोपी, ओंडा मेच की उपस्थिति और भागीदारी स्थापित हो गई है।

जिन 20 आरोपियों को दोषी ठहराया गया उनमें बिस्वराम स्वार्गियारी, पैंथेंग बसुमतारी, अल्फ़ाजोज़ तिमुंग, इनोसेन एंग्टी, रायकोम तिमुंग, रत्नेश्वर तेरांग, फुकन लेखते, अनोस तिमुंग, प्रेस तिमुंग, रूपसिंह क्रो, धोनो मेच, बाबू सिंह क्रो, बिक्रम हंसे, सिकारी रोंगपी, बाबू रोंगपी, विद्या सिंह रोंगपी, मेन्सिंग क्रो, दिपज्योति बसुमतारी, वारेस रोंगपी और ओंडा मेच शामिल हैं। उन्हें गैरकानूनी सभा के सदस्य होने, दंगा करने और गैरकानूनी सभा के तहत हत्या करने सहित कई आरोपों में दोषी ठहराया गया। इसके अलावा, इनमें से तीन, अनोस तिमुंग, रूपसिंह क्रो और बाबू सिंह क्रो को गैरकानूनी सभा के तहत घातक हथियार रखने के आरोप में भी दोषी ठहराया गया।

अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा उनके खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहने का हवाला देते हुए सात साल से ज्यदा समय से जेल में बंद 25 आरोपियों को रिहा करने का भी आदेश दिया।

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