Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये के हर्जाने की मांग करता है, तो मुआवजा उसकी मनमर्जी के आधार पर नहीं दिया जा सकता। हर मामले में नुकसान का ठोस और तार्किक आकलन जरूरी होता है।

इसी सिद्धांत पर चलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक मॉडल को “गलत हेयरकट” के मामले में दिए गए 2 करोड़ रुपये के मुआवजे को घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया। मॉडल ने दावा किया था कि गलत हेयरकट की वजह से उसे मानसिक आघात, अवसाद और चिंता का सामना करना पड़ा।

यह फैसला न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने दिया। अदालत आईटीसी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई कर रही थी। आईटीसी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मॉडल को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

4 इंच बाल कटने पर विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने 6 फरवरी के अपने आदेश में कहा कि मुआवजा सिर्फ शिकायतकर्ता की कल्पना या अनुमान के आधार पर नहीं दिया जा सकता। खासकर जब मुआवजे की मांग करोड़ों रुपये की हो, तो उसे साबित करने के लिए भरोसेमंद और ठोस सबूत पेश करना जरूरी है।

शिकायतकर्ता ने खुद को आईआईएम कोलकाता से पढ़ी हुई, प्रबंधन में स्नातकोत्तर और जनसंचार में डिप्लोमा धारक बताया। उन्होंने यह कहते हुए आयोग में शिकायत की कि एक निजी कंपनी द्वारा चलाए जा रहे सैलून की सेवाओं में कमी थी।

12 अप्रैल 2018 को वह एक इंटरव्यू से पहले दिल्ली के आईटीसी मौर्या होटल में स्थित सैलून में बाल कटवाने गई थीं। उनका कहना था कि आमतौर पर जो हेयर स्टाइलिस्ट उनके बाल काटता था, उसके बजाय किसी दूसरे स्टाइलिस्ट ने उनके बाल काटे।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने साफ निर्देश दिए थे कि बाल लंबे फ्लिक्स या लेयर्स में काटे जाएं, लेकिन इसके बावजूद स्टाइलिस्ट ने नीचे से करीब 4 इंच बाल काट दिए। यह देखकर वह बहुत हैरान रह गईं। वहीं, कंपनी का कहना था कि बाल बिल्कुल शिकायतकर्ता की इच्छा और संतुष्टि के अनुसार ही काटे गए थे।

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राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने 2021 में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए 2 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया। आयोग ने माना कि बालों के इलाज में इस्तेमाल किए गए रसायनों से उनकी खोपड़ी को स्थायी नुकसान हुआ। आयोग ने यह भी कहा कि सैलून की लापरवाही के कारण उन्हें गंभीर मानसिक तनाव झेलना पड़ा और उनके कुछ नौकरी के मौके भी छूट गए।

‘मुआवजा साक्ष्य पर आधारित होना चाहिए’

मुकदमे के पहले चरण में, फरवरी 2023 में अदालत ने यह तो माना कि कंपनी की सेवा में कमी थी और इस बारे में आयोग के निष्कर्ष सही थे, लेकिन अदालत ने मुआवजे की राशि को रद्द कर दिया, क्योंकि इतनी बड़ी रकम देने के पक्ष में कोई ठोस और भरोसेमंद सबूत रिकॉर्ड में मौजूद नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ “दर्द, पीड़ा और मानसिक आघात” के आधार पर शिकायतकर्ता को 2 करोड़ रुपये जैसा भारी मुआवजा देना उचित नहीं है।

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