चंडीगढ़ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रिलायंस जियो के खिलाफ निर्देश देने वाले आदेश को बरकरार रखा जिसमें एक व्यक्ति को ब्याज सहित 12729 रुपये भुगतान करने को कहा गया था। साथ ही परेशानी करने के लिए 7000 मुआवजा और मुकदमे का खर्च भी भुगतान करने को कहा है।

व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि मार्च 2024 में उसके घर पर लगाए गए रिलाएंस जियो कनेक्शन में वह फाइबर सेवा नहीं दी गई, जिसका उससे वादा किया गया था।

जियो की अपील की खारिज

आयोग की अध्यक्ष पद्मा पांडे और सदस्य राजेश कुमार आर्य ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग -II चंडीगढ़ के दिसंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उपभोक्ता सुशील कुमार अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुनाया गया था।

आयोग ने 8 जून को अपील खारिज करते हुए कहा, “हमने पाया कि जिला आयोग द्वारा पारित आदेश इस मामले पर तथ्यों और कानून की सही समझ पर आधारित है और इसमें कोई अवैधता या विकृति नहीं है जिसके लिए इस आयोग के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो।”

उपभोक्ता ने क्या किया था दावा?

मामले के रिकॉर्ड के मुताबिक, सुशील कुमार अग्रवाल ने 13 मार्च 2024 को रिलायंस जियो से ब्रॉडबैंड फाइबर कनेक्शन खरीदा था, जिसके लिए उन्होंने एक साल की योजना के लिए 12729 रुपये का अग्रिम भुगतान भी कर दिया था, उनके घर कनेक्शन 13 मार्च 2024 को लगा था। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि जल्द ही उन्हें पता चल गया कि उनके घर लगाया गया कनेक्शन ऑप्टिकल फाइबर वायर्ड कनेक्शन नहीं बल्कि वायरलेस कनेक्शन थी।

इसके बाद उन्होंने कंपनी से इस बारे में बात की तो कथित तौर पर भरोसा दिया कि यह सेवा वायर्ड फाइबर सर्विस की तरह की काम करेगी और असीमित डेटा प्रदान करेगी।

यह परेशान इंस्टॉलेशन के करीब 18 दिन बाद सुशील के सामने आ गई, जब उनका डेटा कोटा खत्म हो गया और उन्हें अतिरिक्त डेटा के इस्तेमाल के लिए फिर से रिचार्ज कराना होगा।

फिर खुद को गुमराह महसूस करते हुए जियो के कस्टमर केयर से संपर्क किया और 3 अप्रैल 2024 को सर्विस बंद करने और भुगतान की गई राशि वापस करने की मांग की।

उपभोक्ता ने फोरम को बताया कि लिखित अनुरोधों और लगातार बातचीत के बाद भी कंपनी ने पैसे वापस नहीं किए, जब उनकी कोशिशों का कोई परिणाम नहीं मिला तो उन्होंने सर्विस में कमी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग से शिकायत की।

जिला आयोग के सामने पेश नहीं हुए जियो के प्रतिनिधि

नोटिस जारी होने के बावजूद रिलायंस जियो और उसके प्रतिनिधि जिला आयोग के सामने पेश नहीं हुए और अंतत: उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई।

रिकॉर्ड में रखे गए सबूतों पर विचार करने के बाद, जिला आयोग ने 18 दिसंबर 2025 को शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। फोरम ने रिलायंस जियो को 13 मार्च 2024 से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज समेत 12729 रुपये वापस करने का निर्देश दिया। साथ ही उत्पीड़ने और मुकदमे के खर्च भी 7000 रुपये के रूप में देने को कहा।

जिला आयोग ने पाया था कि कंपनी ने न तो वादे के मुताबिक सर्विस दी और न ही ग्राहक के पैसे वापस किए।

जियो ने क्या किया था दावा?

इस आदेश को चुनौती देते हुए रिलायंस जियो ने तर्क दिया कि ग्राहक ने जानबूझकर पारंपरिक वार्यड जियो फाइबर कनेक्शन के बजाय जियो एयरफाइबर का विकल्प चुना था।

कंपनी ने दावा किया कि चुने गए प्लान में 1000 जीबी की मासिक डेटा सीमा थी और सीमा से अतिरिक्त उपयोग करने वाले यूजर को अतिरिक्त डेटा खरीदना पड़ता है। जियो के मुताबिक, अगले बिलिंग साइकिल में कोटो बहाल कर दिया जाएगा। कंपनी ने यह भी दलील दी कि प्लान की शर्तों स्पष्ट थीं और जिला आयोग ने पैसे वापस करने का आदेश देकर गलती की।

कंपनी से मदद नहीं मिली

राज्य आयोग ने गौर किया कि ग्राहक की ओर से पूरे साल का भुगतान पहले की कर दिए जाने के बावजूद कनेक्शन केवल 14 मार्च 2024 से 26 अप्रैल 2024 तक ही एक्टिव रहा। सुशील के घर से मिले उपकरण वापस लेने के बाद कंपनी की ओर से भेजा गया ईमेल अहम सबूत माना गया। इमेल में जियो की ओर से कहा गया कि उपकरण काम करने वाली स्थिति में पाया गया है और उनकी पात्र राशि का रिफंड जल्द किया जाएगा। हालांकि उसके बावजूद भी पैसे वापस नहीं किए गए।

आयोग ने पाया कि कंपनी से सीधे समाधान प्राप्त करने में असमर्थ होने के बाद उपभोक्ता को कोर्ट की ओर रूख करना पड़ा।

यह भी पढ़ें: तेलंगाना: भैंस की मौत के 10 साल बाद किसान को बीमा का पैसा, कूरियर कंपनी ने गुम कर दिए थे जरूरी दस्तावेज

तेलंगाना में एक किसान की एक दशक बाद बीमा कंपनी से भैंस की मौत के बाद पैसा मिला है। तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने किसान को 80,000 भुगतान करने का आदेश दिया है। किसान के भैंस की मौत 10 साल पहले 2016 में गंभीर हेपेटाइटिस के कारण हो गई थी और उसके डाक्यूमेंट कथित तौर पर कूरियर ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खो गए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें