Legal News: केरल के एक ग्राहक ने एक दुकान से 150 ग्राम का पार्ले का बिस्किट खरीदा लेकिन जब उसका वजन चेक किया तो उसमें कथित तौर पर केवल 126 ग्राम ही बिस्किट था। इसको लेकर ग्राहक ने कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर अब जिला कंज्यूमर फोरम ने आदेश दिया है कि पार्ले कंपनी और रिटेल दुकानदार ग्राहक को 50,000 रुपये का मुआवजा दें।

कंज्यूमर फोरम के प्रमुख रवि सुशा, कमेटी सदस्य मोलिकुट्टी मैथ्यू और सजीश केपी ने पार्ले को मुआवजे और मुकदमेबाजी लागत के रूप में 35,000 रुपये और खुदरा विक्रेता को 15,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

मुआवजा नहीं दिया तो होगा लगेगा ब्याज

उपभोक्ता आयोग ने कहा, “केस में विपक्षी संख्या 1 पारले और विपक्षी संख्या दो खुदरा विक्रेता को इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से एक महीने के भीतर उपभोक्ता को 35 हजार रुपये देने होंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो जुर्माना आदेश की तिथि से भुगतान होने तक 12% प्रति वर्ष की दर से लगाया जाएगा, और शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के प्रावधानों के अनुसार आदेश को लागू कर सकता है।”

कम वज़न वाला बिस्किट का पैकेट

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने कन्नूर की एक दुकान से 25 रुपये का पार्ले बिस्कुट का एक पैकेट खरीदा था। घर लौटने पर उसे शक हुआ कि पैकेट का वजन कम है, इसलिए उसने पास की एक दुकान पर उसका वजन करवाया, जहां उसका वजन घोषित 150 ग्राम के बजाय केवल 126 ग्राम निकला। इसके बाद उसने निर्माता द्वारा अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

कंपनी ने बचाव में क्या कहा?

पार्ले बिस्कुल ने कंज्यूमर आयोग में दिए अपने तर्कों में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया। कंपनी ने कहा है कि उनके उत्पाद पूरी तरह से स्वचालित कारखानों में निर्मित होते हैं, जहां उत्पादन प्रक्रिया के दौरान कम वजन वाले पैकेट अस्वीकार कर दिए जाते हैं। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने कभी भी उनसे सीधे संपर्क नहीं किया था और दावा किया कि विवादित पैकेट उनके द्वारा निर्मित असली उत्पाद नहीं हो सकता है।

दुकानदार ने क्या कहा?

खुदरा विक्रेता ने कहा कि वह केवल उत्पाद का विक्रेता है और शिकायतकर्ता ने कभी भी प्रतिस्थापन या शिकायत के लिए स्टोर से संपर्क नहीं किया था। इसलिए उन्होंने शिकायत को खारिज करने का अनुरोध किया। कार्यवाही के दौरान विवादित पैकेट को जांच के लिए कानूनी माप विभाग को भेजा गया। विभाग की रिपोर्ट में पाया गया कि पैकेट का कुल वजन 126.16 ग्राम था, जबकि पैकेजिंग पर शुद्ध वजन 150 ग्राम बताया गया था।

पार्ले द्वारा यह दोहराने के बाद कि विवादित पैकेट उसके द्वारा निर्मित नहीं था, आयोग ने पाया कि खुदरा विक्रेता ने स्वयं स्वीकार किया था कि उत्पाद पार्ले का था। आयोग ने यह भी कहा कि यदि खुदरा विक्रेता का दावा झूठा होता, तो निर्माता उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

दुकानदार दायित्व से मुक्त नहीं

निर्माता और खुदरा विक्रेता दोनों को उत्तरदायी ठहराते हुए आयोग ने कहा कि खुदरा विक्रेता केवल विक्रेता होने का दावा करके जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। आयोग ने कहा, “कम वजन वाले उत्पाद को बेचना विक्रेता की ओर से अनुचित व्यापार प्रथा है। विक्रेता द्वारा उत्पाद खरीदने से पहले उसका वजन किया जाना चाहिए। इसलिए, ओपी नंबर 2 दायित्व से मुक्त नहीं है।”

आयोग ने पार्ले बिस्किट कंपनी को मुआवजे के तौर पर 25,000 रुपये और मुकदमेबाजी लागत के लिए 10,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया, जबकि खुदरा विक्रेता को मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

केस से क्या सबक?

इस केस का निष्कर्ष यह माना जा सकता है कि कम वजन वाले पैकेटबंद सामान के लिए निर्माता और खुदरा विक्रेता दोनों उत्तरदायी हो सकते हैं। निर्माता बिना सबूत के केवल समान को नकली बताकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता, वहीं खुदरा विक्रेताओं का भी यह कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके द्वारा बेचे जाने वाले सामान का घोषित वजन और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।

यह भी पढ़ें: ‘चुनाव जीतने के बाद आप लोगों के सिर पर फाइलें और कुर्सियां ​​फेंकते हैं?’ नेता को हाई कोर्ट ने खूब लताड़ा

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के पार्षद रमेश म्हात्रे को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। उन पर डोंबिवली के एक सरकारी अस्पताल में तीन डॉक्टरों पर हमला करने का आरोप है। पढ़िए पूरी खबर…