Bombay High Court News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को भगोड़े आर्थिक अपराधी (FEO) और शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत आकर यह बताने का एक आखिरी मौका दिया कि वह भारत आएगें या नहीं। कोर्ट ने कहा कि उसे कानून की वैलिडिटी को चुनौती देने वाला केस लड़ने के लिए भारत आना चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की पीठ ने कहा, “आपको वापस आना होगा। अगर आप वापस नहीं आ सकते, तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते।” कोर्ट ने माल्या की उस याचिका की सुनवाई थी जिसमें उन्होंने एफईओ अधिनियम और उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की कार्यवाही को चुनौती दी थी।

कोर्ट ने पहले माल्या को एक एफिडेविट में यह बताने का आदेश दिया था कि वह भारत लौटेंगे या नहीं। इस बैकग्राउंड में, गुरुवार को सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने एक बार फिर साफ किया कि माल्या की याचिका पर भारत लौटने के बाद ही सुनवाई होगी। इन निर्देशों के बावजूद, बेंच ने आज यह पाया कि माल्या भारत लौटने के अपने इरादे के बारे में हलफनामा पेश करने में विफल रहे थे। अदालत ने टिप्पणी की, “आप (भारतीय और यूके) अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं, इसलिए आप भगोड़े आर्थिक अपराधी (FEO) अधिनियम को चुनौती देने वाली वर्तमान याचिका का लाभ नहीं उठा सकते।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या दलीलें दीं?

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि माल्या ने एक हलफनामा दायर कर दावा किया है कि बैंकों द्वारा उनसे पैसे की मांग करना गलत था और वह मामले को वसूली की कार्यवाही में बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि माल्या ने 2018 के अधिनियम को तभी चुनौती दी जब वह भगोड़ा बन चुका था और भारत लंदन में प्रत्यर्पण कार्यवाही के अंतिम फेज में था। उन्होंने कहा कि माल्या भारत आकर सब कुछ साबित कर सकता है, लेकिन उसे भारतीय कानून पर अविश्वास नहीं करना चाहिए और फिर भी न्याय का दावा करना चाहिए।

मेहता ने कहा, “वह आकर हलफनामे में दी गई हर बात पर चर्चा कर सकते हैं। कि मैं भुगतान करने को तैयार हूं, भुगतान करने को तैयार नहीं हूं या भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हूं। लेकिन वह इस देश के कानून पर अविश्वास नहीं कर सकते और न्यायसंगत क्षेत्राधिकार का सहारा नहीं ले सकते।”

हम आपको एक और अवसर दे रहें हैं- माल्या के वकील

माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने एक फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि कानून की प्रकृति को देखते हुए माल्या को भारत आए बिना भी सुनवाई का अवसर दिया जा सकता है। हालांकि, बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि माल्या को यह बताने का निर्देश देने वाला एक मौजूदा आदेश है कि वह कब लौटने का प्रस्ताव रखते हैं। फिर कोर्ट ने कहा, “आपके साथ न्याय करते हुए, हम इसे खारिज नहीं कर रहे हैं; हम आपको एक और अवसर दे रहे हैं।” कोर्ट ने मामले की सुनवाई अगले हफ्ते तक स्थगित कर दी। बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट ने खत्म किया 77 साल पुराना किराएदारी विवाद पढ़ें पूरी खबर…