सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को YSR कांग्रेस पार्टी के एमएलसी अनंत उदय भास्कर उर्फ अनंत बाबू से जुड़े 2022 के हत्या मामले की जांच पर तीखी टिप्पणी की। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने पाया कि पुलिस और सत्ता में बैठे लोगों के बीच स्पष्ट सांठगांठ थी और जांच एजेंसी द्वारा भास्कर को जमानत दिलाने के प्रयास किए गए थे।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने कहा कि यह पुलिस और सत्ता की सांठगांठ का स्पष्ट मामला है। पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपियों के साथ मिलीभगत कर रही हैं और अपीलकर्ता को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) के तहत जमानत दिलाने के लिए सभी कोशिश की गईं। हालांकि, हाई कोर्ट ने जमानत नहीं दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि भास्कर के खिलाफ मुकदमा 30 30 नवंबर तक पूरा कर लिया जाए।
यह मामला भास्कर के पूर्व ड्राइवर, दलित व्यक्ति वीधी सुब्रह्मण्यम की 19 मई, 2022 को हुई मौत से संबंधित है। काकीनाडा जिले के एमएलसी बाबू पर आरोप है कि उन्होंने बहस के दौरान उन्हें धक्का दिया, जिससे वे गिर गए और उनकी मौत हो गई। पांच दिन बाद उन्हें विशेष मोबाइल न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। उस समय काकीनाडा के पुलिस उपाधीक्षक, रविंद्रनाथ अनंत बाबू ने मीडिया को बताया था कि एमएलसी ने अपराध स्वीकार कर लिया था।
जुलाई 2025 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने निचली अदालत के जांच के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति मामलों के लिए विशेष न्यायालय ने बाद में 90 दिनों के भीतर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का आदेश दिया। राज्य में तेलुगु देशम पार्टी सरकार के निर्णय के बाद पुनर्जांच शुरू की गई।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भास्कर को अंतरिम जमानत दे दी थी। आज न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि भास्कर पिछले दो वर्षों से अंतरिम जमानत का लाभ उठा रहे हैं। आंध्र प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने न्यायालय को सूचित किया कि एक पूरक आरोपपत्र दायर किया गया है। न्यायालय ने कहा कि यह जघन्य अपराध की जांच के मामले में आरोपी के साथ राज्य पुलिस की मिलीभगत न सही, तो लापरवाही को दर्शाता है, जो कि घोर लापरवाही है।
सुप्रीम कोर्ट ने बाबर के नाम पर मस्जिद पर बैन की मांग ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें ‘बाबर’ या ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर मस्जिद निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि देशभर में किसी भी मस्जिद का निर्माण या नाम ‘बाबर’ ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर नहीं होना चाहिए। याचिका में तर्क दिया गया था कि मुगल शासक बाबर ‘हिंदू विरोधी आक्रमणकारी’ था। इसलिए उसके नाम पर किसी भी धार्मिक ढांचे की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पढ़ें पूरी खबर।
