सीजेआई सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर देश के युवाओं को लेकर टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि किसी को भी धमकी नहीं देनी चाहिए और ना ही कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन आम लोगों के लिए परेशानी पैदा करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह टिप्पणी नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की।

एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस दावे पर प्रतिक्रिया दी कि सड़कों पर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं और इससे उनका करियर बर्बाद हो सकता है।

CJI ने कहा, ”उन्हें धमकी नहीं देनी चाहिए और कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं करनी चाहिए। हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है… कानून के तहत जो अनुमति है, वह किया जा सकता है। लेकिन सड़कों पर आकर आम लोगों के लिए परेशानी पैदा नहीं करनी चाहिए।”

कॉकरोच वाले बयान पर विवाद

पिछले हफ्ते ही सीजेआई सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं को लेकर SC में तल्ख टिप्पणी की थी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा मीडिया, सोशल मीडिया यूजर्स, आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता कॉकरोच की तरह बन जाते हैं और फिर व्यवस्था पर हमला करना शुरू कर देते हैं। सीजेआई ने आगे कहा कि कॉकरोच की तरह कुछ युवा ऐसे हैं जिन्हें न तो रोजगार मिलता है और न ही पेशे में कोई स्थान। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता बन जाते हैं और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।

सीजेआई सूर्यकांत की इस टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। जिसके बाद CJI ने इस मुद्दे पर अपनी सफाई भी पेश की। मुख्य न्यायाधीश ने युवाओं के बारे में अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने इसे गलत तरीके से पेश किया था।

‘हवाई अड्डे का नाम तय करना अदालत का काम नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी हवाई अड्डे का नाम क्या होना चाहिए, यह तय करना न्यायालय का काम नहीं है और इस तरह के मामलों में दखल देना नीति निर्माण के क्षेत्र में हस्तक्षेप करने जैसा होगा।

मामले की सुनवाई भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने की। याचिका ‘प्रकाशझोट सामाजिक संस्था’ की ओर से दायर की गई थी जिसमें महाराष्ट्र सरकार के उस प्रस्ताव पर केंद्र को समयबद्ध फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इसके तहत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम बदलकर ‘लोकनेता डी बी पाटिल नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा’ रखने का प्रस्ताव है।

पीठ ने नवंबर 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करने से भी इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी मांग उठाने की स्वतंत्रता दी।