केंद्र सरकार ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच को सूचित किया कि वह एलपीजी संकट से निपटने के लिए उपचारात्मक उपाय कर रही है। ताकि ईरान-इजराइल युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई कमी के असर से भारत प्रभावित न हो।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अनिल एस किलोर और राज डी वाकोडे की पीठ को बताया कि बातचीत चल रही है और सरकार अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे कदमों का जानबूझकर खुलासा नहीं किया जा रहा है। इसलिए, उन्होंने अदालत से एलपीजी डीलरों द्वारा दायर याचिका को बंद करने का आग्रह किया, जिन्होंने दावा किया था कि ईरान-इजराइल युद्ध के कारण कमी के बीच घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है।

मेहता ने कहा कि राजनयिक स्तर पर बातचीत चल रही है। इसलिए हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। सरकार पर भरोसा रखते हुए न्यायालय इस मामले को बंद करने पर विचार कर सकता है। व्यक्तिगत मुद्दों को राज्य सरकार को ही उठाना चाहिए। न्यायालय ने सरकार की दलीलों पर विचार किया और याचिका को बंद कर दिया।

एलपीजी डीलरों ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि गंभीर कमी के बीच घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है। डीलरों ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में आपूर्ति बाधित हुई है। उन्होंने CPIL पर स्थानीय उपभोक्ताओं को होने वाली कठिनाइयों की परवाह किए बिना एलपीजी को निर्यात के लिए मोड़ने का आरोप लगाया।

12 मार्च को, पीठ ने केंद्र सरकार और कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड (सीपीआईएल) को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा। 12 मार्च को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस मुद्दे को “गंभीर” बताया। नोटिस के जवाब में केंद्र सरकार ने एक हलफनामा दायर किया जिसमें कहा गया कि स्थिति लगातार बदल रही है और नागरिकों के हित में कदम उठाना सरकार का कर्तव्य है।

हलफनामे में कहा गया है, “विषय की प्रकृति को देखते हुए, अदालती कार्यवाही में इन मुद्दों पर चर्चा या बहस करना उचित नहीं हो सकता है। विषय की प्रकृति और इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, जो कुछ जिलों के अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं है, न्यायालय व्यापक जनहित में इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों पर छोड़ सकता है। “

आज जब इस मामले की सुनवाई हुई तो सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि जब किसी थोक या खुदरा वितरक द्वारा कर्तव्य की व्यक्तिगत लापरवाही या कानून के उल्लंघन के कारण कोई स्थानीय समस्या उत्पन्न होती है, तो अधिकारी सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने मामले को बंद करने की कार्यवाही शुरू की।

सुप्रीम कोर्ट पर बढ़ता बोझ: 3500 से ज्यादा जनहित याचिकाएं लंबित, सबसे पुरानी 42 साल से अटकी

सुप्रीम कोर्ट में इस समय 3,500 से ज्यादा जनहित याचिकाएं (PIL) लंबित हैं। मुख्य रूप से संवैधानिक व्याख्या और तात्कालिक आपराधिक अपीलों से जुड़े मामलों के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च अदालत में PIL की यह संख्या चौंकाने वाली है। इनमें से 698 याचिकाएं 10 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। वहीं सबसे पुरानी याचिका 42 वर्षों से अब तक निपटाई नहीं जा सकी है। पढ़ें पूरी खबर।