मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने सात महीने की गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा को घटाकर सात साल के कठोर कारावास में बदल दी। न्यायालय का मानना ​​है कि हमला पूर्व नियोजित नहीं था, बल्कि अचानक और गंभीर उकसावे के कारण घटना घटी।

18 जून को अपने फैसले में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने पत्नी के उन शब्दों पर गौर किया जो उसने विवाद के दौरान कहे थे। पत्नी ने कहा था, “वह तुम्हारे जैसे हजारों पति रख सकती है”।

कोर्ट ने कहा कि यह टिप्पणी पति के सम्मान और गरिमा पर सीधा हमला थी। इसे कानून की नजर में ‘गंभीर और अचानक उकसावा’ माना जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि पति ने हत्या की कोई पूर्व योजना नहीं बनाई थी। उसने मौके पर मौजूद पत्थर का इस्तेमाल किया और वारदात के बाद तुरंत पुलिस को घटना की जानकारी दी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चौराही ब्लॉक के निवासी शिव कहार ने 18 सितंबर, 2021 को अपनी पत्नी किरण की हत्या कर दी थी। किरण उस समय सात महीने की गर्भवती थी और कहार द्वारा कथित तौर पर बहस के दौरान पत्थर से सिर पर वार करने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।

अपने बयान में कहार ने बताया कि घटना वाले दिन पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। इस दौरान किरण ने कहा था, “मैं तुम्हारे जैसे हज़ार पति रख सकती हूं।” इस टिप्पणी से क्रोधित होकर उसने पास पड़ा एक पत्थर उठाया और किरण के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। बाद में उसने घटना की जानकारी अपने ससुर को दी और पुलिस में भी सूचना दर्ज कराई।

पीटीआई के अनुसार, बेंच ने कहा, “मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम पाते हैं कि यह पूर्व नियोजित अपराध नहीं था।”

अदालत ने आगे टिप्पणी की, “जब कोई पत्नी अपने पति के बारे में कहती है कि ‘वह उसके जैसे हज़ार पति रख सकती है’, तो यह पति की अक्षमता की ओर अप्रत्यक्ष/छिपी हुई टिप्पणी है। इसलिए, इसे अचानक और गंभीर उकसावा कहा जा सकता है।”

छिंदवाड़ा की एक निचली अदालत ने कहार को दोषी ठहराया था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने उसकी अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि यह अपराध जानबूझकर हत्या करने के इरादे से किए गए अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

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