कलकत्ता हाई कोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारियों द्वारा सरकारी क्वार्टर पर बिना इजाजत कब्जा करने के खिलाफ एक कड़ा फ़ैसला सुनाया। कलकत्ता हाई कोर्ट ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत सक्षम प्राधिकरण द्वारा पास किए गए ऑर्डर को चुनौती दी गई थी। इस मामले में कर्मचारी को ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया गया था।
ग्रेच्युटी से पेनल्टी रेंट काटने का कंपनी को हक- हाई कोर्ट
फैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट कोर्ट ने कहा कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड को किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी से पेनल्टी रेंट काटने का हक है, अगर वे सुपरएनुएशन के बाद कंपनी का घर खाली करने से मना करते हैं। जस्टिस शम्पा दत्त ने कहा कि इस तरह के बर्ताव से गलत इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और काम कर रहे कर्मचारियों को उनका हक़ भी नहीं मिलेगा।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 1 अप्रैल के अपने ऑर्डर में कहा, “अगर इस तरह के बर्ताव को बर्दाश्त किया जाता है तो इससे दूसरों को भी ऐसा करने के लिए बढ़ावा मिलेगा। इसके कारण ऐसी स्थिति पैदा होगी जहां उन कर्मचारियों को क्वार्टर नहीं दिए जा सकेंगे जो नौकरी कर रहे हैं और ऐसी सुविधा के हकदार हैं।”
घर खाली करने को मिला था नोटिस
कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी 31 जनवरी, 2025 को रिटायर हो गया थी और उसे अपने सरकारी क्वार्टर को खाली करने का नोटिस दिया गया था, जो आज तक नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि बकाया किराया और पीनल रेंट सरकारी बकाया हैं और इसलिए कंपनी को ग्रेच्युटी सहित रिटायरमेंट बेनिफिट्स से ऐसे बकाया काटने का अधिकार है।
वहीं कर्मचारी ने कोर्ट में माना है कि वह तय समय से ज़्यादा समय तक रुका रहा। कलकत्ता हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जमा की गई 18.99 लाख रुपये की ग्रेच्युटी की रकम कंपनी को वापस कर दी जाए, जो कर्मचारी के रहने की जगह खाली करने तक ग्रेच्युटी से किराया और पीनल चार्ज काटने के लिए आज़ाद है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि कर्मचारी के रहने की जगह खाली करने के बाद ग्रेच्युटी से कुल बकाया काट लिया जाए और बाकी रकम (अगर कोई हो) उन्हें 15 दिनों के अंदर दे दी जाए।
बता दें कि कर्मचारी 15 जनवरी 1987 से कंपनी में काम करता था। रिटायर होने के समय कर्मचारी पश्चिम बर्धमान जिले के मेडिकल डिपार्टमेंट में कंपाउंडर के तौर पर काम कर रहा था। सरकारी कर्मचारी को कंपनी ने उसकी सर्विस के दौरान पश्चिम बर्धमान जिले में एक रेजिडेंशियल क्वार्टर दिया था। हालांकि वह क्वार्टर अभी भी उसके पास है और आज तक खाली नहीं किया है। यह भी दावा किया गया कि कर्मचारी को उसके रिटायर होने की तारीख के बारे में एक रिटायरमेंट नोटिस के जरिए बताया गया था कि वह अपने रिटायर होने की तारीख पर कंपनी का क्वार्टर कंपनी को सौंप दे।
कर्मचारी को यह भी बताया गया कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें पेनल रेंट देना होगा और यह पेनल रेंट रिटायरमेंट बेनिफिट्स और उनकी ग्रेच्युटी के आगे के पेमेंट से काट लिया जाएगा। इससे यह पता चलता है कि ग्रेच्युटी का पेमेंट तभी किया जाएगा जब वे क्वार्टर खाली कर देंगे।
कोल इंडिया लिमिटेड ने जारी किया था सर्कुलर
कोल इंडिया लिमिटेड ने 11 नवंबर 2021 को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें यह निर्देश दिया था कि उसकी सभी सब्सिडियरी कंपनियों के कर्मचारियों के रिटायरमेंट के बाद क्वार्टर खाली करने के लिए कदम उठाए। इसमें रिटायर्ड कर्मचारी से रिटायरमेंट के बाद क्वार्टर पर बिना इजाजत कब्ज़ा करने के लिए पेनल रेंट लेना और जब तक कर्मचारी क्वार्टर खाली नहीं कर देता, तब तक रिटायरमेंट बेनिफिट्स रोकना शामिल है।
हालांकि कर्मचारी ने कथित तौर पर क्वार्टर खाली नहीं किया है और न ही उसे कंपनी को सौंपा है और वह अभी भी उस पर गैर-कानूनी तरीके से कब्ज़ा किए हुए है। इसके अलावा रिटायर्ड कर्मचारी कंपनी के खर्च पर वहां पानी और बिजली का इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी ने इस आधार पर ग्रेच्युटी रोक ली थी और इसलिए कर्मचारी ने पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत कंट्रोलिंग अथॉरिटी से संपर्क किया, जिसने 18.99 लाख रुपये की ग्रेच्युटी देने का निर्देश दिया। कंपनी ने इसे सक्षम प्राधिकरण के सामने चुनौती दी, जिसने ग्रेच्युटी जारी करने के निर्देश को बरकरार रखा। इन आदेशों से नाराज़ होकर कंपनी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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