Legal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस शुभ्रा घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जज ने कोर्ट के प्राइवेट सेक्रेटरी और नेता के वकील पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस शुभ्रा घोष ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए बताया कि उनके चेंबर में अनधिकृत रूप से केस से जुड़े रिकॉर्ड्स देखने की कोशिश की गई थी।

हाईकोर्ट की जज ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के जज के अनुसार, जब वह अदालत कक्ष में सुनवाई कर रही थीं, उसी दौरान याचिकाकर्ता यानी सुजीत बोस के वकीलों में से एक और उनके निजी सचिव ने चेंबर के बाहर तैनात कर्मचारियों से केस फाइल बाहर लाने की मांग की।

अदालत के स्टाफ ने जताया विरोध

जस्टिस घोष ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब उनके स्टाफ ने गोपनीयता और नियमों का हवाला देते हुए फाइल दिखाने से साफ इनकार कर दिया, तो वकील और प्राइवेट सेक्रेटरी ने जबरन चेंबर के भीतर जाने और रिकॉर्ड्स को खंगालने का प्रयास किया। हालांकि, चेंबर के बाहर मौजूद सतर्क कर्मचारियों ने उनके इस प्रयास को पूरी तरह नाकाम कर दिया और उन्हें रोक दिया।

जज ने जताई कड़ी नाराजगी

इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त करते हुए जस्टिस शुभ्रा घोष ने अपने 19 अगस्त के आदेश में लिखा कि वकील और प्राइवेट सेक्रेटरी की यह साठगांठ किसी अनुचित या गलत मंशा (Oblique Motive) की ओर इशारा करती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए वह अब इस मामले की सुनवाई आगे नहीं करेंगी।

मामला अब एक्टिंग चीफ जस्टिस के पास

जस्टिस घोष ने अपने आदेश में इस केस को खुद से अलग करते हुए पूरी जानकारी कलकत्ता हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के पास भेज दी है।

उन्होंने एक्टिंग चीफ जस्टिस से इस गंभीर मामले का संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई का निर्देश देने का अनुरोध किया है। अब यह मामला किसी नई बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

नगरपालिका भर्ती घोटाले में हुई थी सुजीत बोस की गिरफ्तारी

उल्लेखनीय है कि TMC नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती में हुई कथित धांधली और अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगरपालिका में विभिन्न पदों के लिए अवैध रूप से 150 से अधिक उम्मीदवारों की सिफारिश की थी।

अवैध कमाई और संपत्ति का आरोप

जांच एजेंसी ईडी का यह भी दावा है कि सुजीत बोस ने नौकरियां देने के बदले में अवैध कमाई की है, जिसका इस्तेमाल उन्होंने फ्लैट्स और संपत्ति खरीदने में किया।

इसके अलावा, जांच के दौरान उनके नियंत्रण वाले कई बैंक खातों में भारी मात्रा में नकदी जमा होने के सुराग भी मिले हैं। फिलहाल सुजीत बोस इस मामले में जेल में बंद हैं और उनकी जमानत पर नया फैसला अब दूसरी बेंच करेगी।

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