कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की एक याचिका खारिज कर दी है। टीएमसी ने बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को तैनात करने के निवार्चन अधिकारी के फैसले के खिलाफ अपनी याचिका दायर की थी।
जस्टिस कृष्णा राव ने टीएमसी के इस आरोप को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार के कर्मचारी केंद्र में सत्ताधारी पार्टी भाजपा के नियंत्रण से प्रभावित हो सकते हैं।
आरोपों पर विश्वास करना असंभव- कोर्ट
बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, “मतगणना कक्ष में केवल पर्यवेक्षक और सहायक ही उपस्थित नहीं होंगे। सूक्ष्म पर्यवेक्षक चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के एजेंट और मतगणना कर्मचारी भी मतदान कक्ष में मौजूद रहेंगे। ऐसे में याचिकाकर्ता के आरोपों पर विश्वास करना असंभव है।”
बेंच ने यह भी कहा, “यह कोर्ट राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय कर्मचारियों के मतगणना पर्यवेक्षक और सहायक की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं पाता है।”
कोर्ट ने कहा, “यदि याचिकाकर्ता यह साबित कर देता है कि मतगणना पर्यवेक्षक और सहायक के रूप में नियुक्त केंद्रीय कर्मचारियों ने मतगणना के दौरान वोटों में हेरफेर करके याचिकाकर्ता के प्रतिद्वंद्वी की मदद की तो याचिकाकर्ता को चुनाव याचिका में बिंदुओं की उठाने का पूरा हक है।”
आयोग के अनुसार, राज्य में हाल ही में विधानसभा चुनावों के दो चरणों को मिलाकर कुल वोटिंग परसेंटेज 92.47 फीसदी रहा। राज्य में वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं- टीएमसी
टीएमसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने तर्क देते हुए कहा, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ऐसा आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं था।
इस पर चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता जिष्णु चौधरी ने कहा, सभी नियुक्तियां प्रक्रिया के मुताबिक की गई हैं। आगे उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी आयोग के फैसलों पर सवाल नहीं उठा सकता है। चुनाव आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों को इसलिए प्राथमिकता दी गई है ताकि उन पर किसी भी तरह के आरोप न लगें।
इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए, कोर्ट ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 19ए चुनाव आयोग के कार्यों के प्रत्यायोजन का प्रावधान करती है। इसलिए यह नहीं कह सकते कि अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ऐसे आदेश देने का अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि वोटों की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “दोनों पक्षों को सुनते हुए कोर्ट को इस रिट याचिका में कोई योग्यता नहीं दिखती।”
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