पीड़ित महिलाओं ने शुरुआत में आरोपी के खिलाफ आरोप लगाने से परहेज किया था क्योंकि उन्हें डर था कि ऐसा करने से उनका करियर प्रभावित हो सकता है। जब उन्होंने आखिरकार शिकायत दर्ज कराने का साहस जुटाया तो उन्होंने कथित घटना के देश और वर्ष के बारे में गलत जानकारी दे दी। अदालत ने इस विरोधाभास को अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक बताया।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने 3 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ”सभी पीड़िताओं ने बयान दिया कि उन्होंने करियर को नुकसान पहुंचने के डर से समय पर आरोप नहीं लगाए। लेकिन जब उन्होंने ऐसा करने का साहस किया तब उन्होंने कथित घटना के स्थान (देश) और वर्ष के बारे में गलत जानकारी दी। गवाहों के शुरुआती बयान में घटना के स्थान और वर्ष को लेकर यह बदलाव अभियोजन की कहानी के लिए घातक है।”
आपको बता दें कि महिलाओं ने वर्ष 2023 में बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगाए थे। उस समय वह भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष थे। इस मामले में WFI के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर को भी अदालत ने बरी कर दिया। मामले का आदेश 10 अगस्त को दोनों पक्षों के वकीलों को उपलब्ध कराया गया।
अपने आदेश में एसीजेएम अश्विनी पंवार ने यह भी कहा कि लगाए गए आरोप ‘झूठे और मनगढ़ंत’ हैं तथा ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं।’
अदालत ने आदेश में क्या-क्या कहा
अदालत ने कहा, ”मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि पीड़िता ‘P’ और ‘I P’ के बयानों ने अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को पूरी तरह अविश्वसनीय बना दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि सभी आरोप झूठे और गढ़े हुए थे, जिन्हें ‘V P’, ‘B P’ और महादेव अकादमी के कोचों के कहने पर आरोपियों के खिलाफ गहरी साजिश के तहत सामूहिक रूप से लगाया गया। प्रथम दृष्टया यह राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होता है।”
अदालत ने आगे कहा, “‘P’ और ‘I P’ को शुरुआत से ही पीड़िता के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, जब वे अदालत में पेश हुईं और उनकी काउंसलिंग की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि उनके साथ किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न नहीं हुआ था।” अदालत ने अपने आदेश में यह भी जिक्र किया कि कुछ कथित पीड़िताएं बृजभूषण शरण सिंह के साथ लगातार सौहार्दपूर्ण (मैत्रीपूर्ण) संबंध बनाए हुए थीं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह भी उल्लेखनीय है कि कथित घटनाओं के बाद पीड़िताएं कई वर्षों तक चुप रहीं। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोपी नंबर-1 (A1) यानी बृजभूषण शरण सिंह के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध भी बनाए रखे। रिकॉर्ड पर मौजूद कई तस्वीरें इसकी पुष्टि करती हैं। पीड़िताओं ने उन्हें अपने पारिवारिक कार्यक्रमों और शादी समारोहों में भी आमंत्रित किया था।
न्यायाधीश ने कहा, ”यह समझा जा सकता है कि उस समय WFI अध्यक्ष होने के कारण आरोपी-1 शिकायत करने पर उनका करियर खराब कर सकता था। लेकिन यह बिल्कुल समझ से परे है कि फिर भी वर्षों तक उसके साथ सौहार्दपूर्ण संबंध क्यों बनाए रखे गए।”
अदालत ने आगे कहा, ”चूंकि किसी ने भी आरोपी-1 के खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई और ना ही कथित घटनाओं का किसी तरह विरोध किया। इसलिए इन आरोपों के सही होने की संभावना बेहद कम प्रतीत होती है। पीड़िताएं उच्च अधिकारियों से भी मिलीं लेकिन उन्होंने वहां भी कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं का कोई जिक्र नहीं किया।”
अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई तरह की असंगतियां (Inconsistencies) और बाद में किए गए बदलाव (Improvements) पाए गए जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, ”चयनित महिला पहलवान आगे आईं और उनके द्वारा लगाए गए एक जैसे आरोपों को बेहद सलीके और बनावटी भाषा में तैयार की गई औपचारिक शिकायतों में शामिल किया गया। ये शिकायतें 21 अप्रैल 2023 को पुलिस के समक्ष दर्ज कराई गईं।”
छह शिकायतकर्ताओं में से दो बाद में अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गईं। वहीं तीसरी शिकायतकर्ता के आरोपों पर अदालत ने आरोप तय ही नहीं किए। अदालत ने अपने फैसले में इस बात का भी जिक्र किया।
अदालत ने कहा, ”मैं यह कहने का आधार इस तथ्य से लेता हूं कि जिन पांच पीड़िताओं के आरोपों पर आरोप तय किए गए थे, उनमें से दो ने अभियोजन पक्ष का साथ नहीं दिया। उन्होंने अदालत में कहा कि उन्हें PW-5 और PW-10 (एक महिला पहलवान के पति) के कहने पर बयान देने के लिए मजबूर और दबाव डाला गया था।”
एक अन्य कथित घटना के संबंध में अदालत ने कहा कि हालांकि यह दावा किया गया कि घटना सार्वजनिक स्थान पर कई लोगों की मौजूदगी में हुई थी। लेकिन गवाह ने घटना की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई और ना ही वहां मौजूद किसी स्वतंत्र व्यक्ति को प्रत्यक्षदर्शी के रूप में पेश किया।
एसीजेएम अश्विनी पंवार ने अपने फैसले में यह भी कहा कि एक महिला पहलवान के पति का व्यवहार अभियोजन पक्ष के इस दावे से मेल नहीं खाता कि कथित घटना के बाद आरोपी के प्रति लगातार शत्रुता बनी रही। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता और उसके पति ने आरोपी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे। यहां तक कि कथित घटना के बाद दोनों अपनी शादी के लिए आशीर्वाद लेने आरोपी के घर भी गए थे।
इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के तीन साल बाद ट्रायल पूरा हुआ। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के कुल 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले में दो शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बृजभूषण शरण सिंह ने उनकी सांस लेने की प्रक्रिया (Breathing Pattern) जांचने के बहाने उन्हें अनुचित तरीके से छुआ और यौन उत्पीड़न किया।
टाइमलाइन
28 अप्रैल 2023: दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसी थाने में एक नाबालिग पीड़िता की शिकायत पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत अलग से एक और एफआईआर भी दर्ज की गई।
15 जून 2023: दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें छह महिला पहलवानों के साथ कथित यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और पीछा करने (स्टॉकिंग) के आरोप लगाए गए। चार्जशीट में चार राज्यों के कम से कम 22 गवाहों के बयान शामिल थे, जिनमें पहलवान, रेफरी, कोच और फिजियोथेरेपिस्ट भी शामिल थे।
15 जून 2023: इसी दिन पुलिस ने नाबालिग पीड़िता और उसके पिता द्वारा आरोप वापस लेने के बाद पॉक्सो मामले को रद्द करने की मांग करते हुए अदालत में रिपोर्ट भी दाखिल की।
मई 2024: दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग और यौन उत्पीड़न के आरोप तय किए।
मौजूदा स्थिति: आज की तारीख में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पॉक्सो मामला और यौन उत्पीड़न का मामला दोनों बंद हो चुके हैं। हालांकि, जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश वकील बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च अदालत का रुख कर सकते हैं।
इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन, ऋषभ भाटी, रेहान खान और सूर्यांश सिंह ने पैरवी की। वहीं राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक मनीष रावत पेश हुए। चार शिकायतकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने अधिवक्ता भावूक चौहान, हर्ष बोरा और अनुष्का बरुआ की सहायता से अदालत में पक्ष रखा।
महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों से बरी बृजभूषण सिंह की पहली प्रतिक्रिया
भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से बरी कर दिया गया है। सोमवार 3 अगस्त 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें तीन साल से ज्यादा पुराने इस मामले में आरोप मुक्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद उन्होंने पहली प्रतिक्रिया भी दे दी है। उन्होंने इस बात को दोहराया है कि यह एक साजिश और शड्यंत्र था।
