मालेगांव बम ब्लास्ट में 31 लोगों के मारे जाने के करीब दो दशक बाद, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक स्पेशल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इस मामले के आखिरी बचे चार आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे। इस कारण अब महाराष्ट्र के सबसे खतरनाक आतंकी हमलों में से एक के लिए कोर्ट के कटघरे में खड़ा होने वाला कोई नहीं बचा।

चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम सी.चंदक की बेंच ने 30 सितंबर 2025 के स्पेशल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। अपने आदेश में स्पेशल कोर्ट ने मनोहर नरवारिया, राजेंद्र चौधरी, धन सिंह और लोकेश शर्मा पर आईपीसी के तहत हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए थे। साथ ही गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) एक्ट के प्रावधान भी लगाए थे। इसे आदेश के खिलाफ उनकी अपीलें बुधवार को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है।

अभियोजन प्रक्रिया खत्म

इस फैसले के आने के साथ ही अभी के लिए मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में चल रही आखिरी सक्रिय अभियोजन प्रक्रिया खत्म हो गई है, जिसकी जांच तीन एजेंसियां कर चुकी हैं। जांचों में दो विपरीत सिद्धांत सामने आए हैं जिसमें यह साफ नहीं हो सका कि इसके लिए कौन जिम्मेदार था और जिसमें बीते 19 सालों में एक भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सका।

31 लोगों की गई थी जान

8 सितंबर 2006 को मालेगांव में एक मजिस्द और कब्रिस्तान के पास बम ब्लास्ट हुआ था, इसमें 31 लोगों की जान चली गई और 312 लोग घायल हो गए थे। इसके बाद महाराष्ट्र एंटी टेरेरिज्म स्क्वाड ने कार्रवाई करते हुए नौ मुसलमानों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 2007 में सीबीआई ने इसकी जांच अपने हाथों में ली, उसने भी इन्हीं को आरोपी बनाए रखा। पर जब एनआईए ने इस मामले में दखल दिया तो उसने इस केस की पूरी थ्योरी को ही उलट दिया और सभी नौ लोगों को बेकसूर बताया। साथ ही इसके बजाय हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क की ओर संकेत दिया।

इस मामले का मुख्य आधार दिसंबर 2010 में स्वामी असीमानंद का एक बयान था। असीमानंद पहले ही धमाकों के अन्य मामलों में हिरासत में थे और उसने दावा किया कि सुनीश जोशी ने उन्हें बताया था कि 2006 का मालेगांव धमाका उनके चार लड़कों ने किया था। एनआईए ने इसी बयान का इस्तेमाल करके नई चार्जशीट बनाई, जिसमें चार अपीलकर्ताओं के साथ-साथ अब मृत सुनील जोशी और तीन अन्य लोगों को भी नामजद किया गया, जो अब भी फरार हैं।

असीमानंद ने बयान लिया था वापस

पर जल्द ही असीमानंद ने अपना बयान वापस ले लिया और दावा किया कि उनसे यह बयान यातना देकर लिया गया था। सबसे जरूरी बात यह है कि समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ धमाका मामलों में उनकी सुनवाई कर रही सभी कोर्ट ने उस बयान को अविश्वसनीय मानते हुए खारिज कर दिया और उन्हें बरी कर दिया था।

इन चारों व्यक्तियों के वकील एडवोकेट कौशिक म्हात्रे ने जनवरी में बॉम्बे हाई कोर्ट के समाने तर्क दिया कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और एक बयान जिस पर दूसरी कोर्ट ने भी भरोसा नहीं किया था, उसके आधार पर आरोप तय नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट को हस्तक्षेप का प्रथम दृष्टया मामला मिला और उसने अपने अंतिम आदेश आने तक मुकदमे पर रोक लगा दी है।

छह साल बाद मिली थी जमानत

अपीलकर्ता मनोहर नरवारिया, राजेंद्र चौधरी, धन सिंह और लोकेश शर्मा को 2013 में गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने छह साल जेल में बिताए। इसके बाद 2019 में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी और विशेष जोर देते हुए कहा कि उन्हें बिना किसी मुकदमे के छह साल से भी अधिक समय तक जेल में रखा गया।

इसी बीच शुरू में गिरफ्तार किए गए नौ मुस्लिम व्यक्तियों को 2016 में बरी कर दिया गया लेकिन एटीएस ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। हालांकि 2019 के बाद से अब तक इस चुनौती पर सुनवाई नहीं की गई है और यह अभी भी लंबित है।

मालेगांव बम धमाके का असली मुजरिम कौन?

बुधवार को हाईकोर्ट के फैसले ने 2006 के मालेगांव धमाका मामले को अजीब स्थिति में डाल दिया है कि आखिर इस मामले का असली मुजरिम कौन है? क्योंकि कोर्ट ने पहले ही मूल आरोपियों को बरी कर दिया था और अब हाईकोर्ट ने भी उनकी जगह लाए गए आरोपियों पर से भी आरोप रद्द कर दिए।

यह फैसला एक विशेष एनआईए कोर्ट द्वारा 2008 के अलग मालेगांव धमाका मामले में सभी सात आरोपियों जिसमें पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल थे, अपर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए बरी करने के एक साल से भी कम समय बाद आया है।

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि उसने मोरमुगाओ बंदरगाह प्राधिकरण (MPA) की जमीन पर अतिक्रमण रोकने में घोर लापरवाही हुई है। यह मामला वास्को के हेडलैंड साडा क्षेत्र में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाए जाने से जुड़ा है। जिसकी अवैधता को लेकर बार-बार शिकायतें की गईं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें