बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि उसने मोरमुगाओ बंदरगाह प्राधिकरण (MPA) की जमीन पर अतिक्रमण रोकने में घोर लापरवाही हुई है। यह मामला वास्को के हेडलैंड साडा क्षेत्र में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाए जाने से जुड़ा है। जिसकी अवैधता को लेकर बार-बार शिकायतें की गईं।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस. जमसांदेकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह MPA को सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध कराए, ताकि प्रतिमा को ध्वस्त किया जा सके और उस जंक्शन को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जा सके। कोर्ट ने राज्य के इस तर्क को खारिज कर दिया कि बंदरगाह को सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत उपायों तक ही सीमित रहना चाहिए या अपनी सीआईएसएफ सुरक्षा पर निर्भर रहना चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा, “राज्य ने केवल एक मूकदर्शक की तरह काम किया है और वास्तव में आपराधिक अतिक्रमण को रोकने के लिए कोई सहायता प्रदान किए बिना, घुसपैठ करने वालों के साथ मौन रूप से मिलीभगत की है।”
कोर्ट ने इसमें बोगदा पुलिस निरीक्षक, मोरमुगाओ तालुका के कार्यकारी मजिस्ट्रेट, मोरमुगाओ के उप कलेक्टर और अन्य अधिकारियों द्वारा बंदरगाह की संपत्ति में घुसपैठ को रोकने के लिए “घोर निष्क्रियता” का भी उल्लेख किया गया।
न्यायालय ने कहा, “हमारा मानना है कि जहां कानून और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल हैं, जैसे कि वर्तमान मामला, वहां केवल राज्य ही अपनी एजेंसियों जैसे पुलिस बल, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और अन्य ऐसे अधिकारियों के माध्यम से ऐसी घटनाओं को पर्याप्त रूप से शांत कर सकता है और सार्वजनिक सुरक्षा और व्यक्तियों की संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित कर सकता है।”
इसमें यह भी निर्देश दिया गया कि मोरमुगाओ के विधायक संकल्प अमोनकर को नोटिस जारी किया जाए। एमपीए ने अधिवक्ताओं योगेश नाडकर्णी, सिमरन खाडिलकर और कुणाल नाडकर्णी द्वारा प्रतिनिधित्व करते हुए उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर किया। जिसमें फरवरी में एक भव्य समारोह में उसकी जमीन पर जबरन प्रवेश करने और शिवाजी की एक स्थायी प्रतिमा को अवैध रूप से स्थापित करने का आरोप लगाया गया।
कहा गया कि अधिकारियों ने शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। एमपीए ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा और शिकायत में विधायक संकल्प अमोनकर, मोरमुगाओ नगर पालिका पार्षद दीपक नाइक और श्रद्धा संकल्प अमोनकर, और रवींद्र भवन के अध्यक्ष जयंत जादव, जो सभी विधानसभा के सदस्य हैं। उनका नाम शामिल किया गया है, जिन्होंने बंदरगाह प्राधिकरण की संपत्ति पर आपराधिक रूप से अतिक्रमण किया और अवैध रूप से स्थापित मूर्ति का अनावरण किया।
हाई कोर्ट ने कहा कि यह बिल्कुल अविश्वसनीय है कि बंदरगाह की भूमि पर इतनी बड़ी सभा की अनुमति दी गई और मोरमुगाओ या बोगदा पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक, वास्को उप-मंडल पुलिस अधिकारी,एसडीएम तथा दक्षिण गोवा के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर दोनों की जानकारी के बिना उस भूमि पर जबरन प्रतिमा का निर्माण और अनावरण किया गया।
न्यायालय ने कहा कि यदि ऐसा है तो इस घटना के संबंध में दक्षिण गोवा जिले और मोरमुगाओ तालुका की कार्यपालिका संरचना पूरी तरह विफल रही है। हालांकि, यह घटना स्थानीय विधायक और बंदरगाह परिसर में जमा हुए अन्य लोगों के बीच एक स्पष्ट और मौन मिलीभगत या समझौते की ओर अधिक इशारा करती है, जिसके चलते बंदरगाह परिसर पर अतिक्रमण को रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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